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PMI: भारत का विनिर्माण पीएमआई अगस्त में 17.5 साल के उच्चतम स्तर पर, उत्पादन और नए ऑर्डर में जबरदस्त तेजी

Mon, 01 Sep 2025 01:25 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत के विनिर्माण क्षेत्र पीएमआई अगस्त में बढ़कर 59.3 हो गया। सोमवार को जारी एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई डेटा के अनुसार यह वृद्धि मुख्य रूप से उत्पादन मात्रा में वृद्धि के कारण हुई। उत्पादन में विस्तार की दर लगभग पांच वर्षों में सबसे तेज हुई है।
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विनिर्माण पीएमआई - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत का विनिर्माण पीएमआई अगस्त में 17.5 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। यह जुलाई के 59.1 से बढ़कर अगस्त में 59.3 हो गया है। सोमवार को जारी एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई डेटा में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार परिचालन स्थितियों में पिछले साढ़े 17 वर्षों में सबसे तेज सुधार को रेखांकित किया गया है। यह देश की फैक्टरी गतिविधि की मजबूती को दर्शाता है।

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PMI का सबसे ज्यादा इस्तेमाल अर्थव्यवस्था में क्रय प्रबंधक सूचकांक के रूप में होता है। इसमें खास तौर पर मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) सेक्टर की स्थिति नापी जाती है। यह एक सर्वे-बेस्ड इंडेक्स है, जिसे हर महीने जारी किया जाता है। 

उत्पादन मात्रा में हुई वृद्धि

यह वृद्धि मुख्य रूप से उत्पादन मात्रा में वृद्धि के कारण हुई। उत्पादन में विस्तार की दर लगभग पांच वर्षों में सबसे तेज हुई है। रिपोर्ट के लिए सर्वेक्षण किए गए पैनल सदस्यों ने इस वृद्धि का श्रेय आपूर्ति और मांग के बेहतर तालमेल को दिया है। 

नए ऑर्डर में 57 महीनों में सबसे ज्यादा तेजी

रिपोर्ट में बताया गया है कि मजबूत घरेलू मांग ने इस महीने के दौरान फैक्टरी ऑर्डर और उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी को बल दिया। नए ऑर्डर जुलाई के समान गति से बढ़े, जो 57 महीनों में सबसे तेज वृद्धि थी।

सफल विज्ञापन अभियानों ने निभाई अहम भूमिका

बढ़ती मांग के अलावा, प्रतिभागियों ने सफल विज्ञापन अभियानों को भी बिक्री बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने वाला बताया। सबसे ज्यादा बिक्री और उत्पादन वृद्धि मध्यवर्ती वस्तुओं की श्रेणी में देखी गई, उसके बाद पूंजीगत वस्तुओं और फिर उपभोक्ता वस्तुओं का स्थान रहा।

विदेशी मांग में वृद्धि पिछले पांच महीनों में सबसे कम रही

एचएसबीसी ने बताया कि भारतीय निर्माताओं को दिए गए अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर पिछले महीनों की तुलना में धीमी गति से बढ़े। विदेशी मांग में वृद्धि पिछले पांच महीनों में सबसे कम रही, हालांकि ऐतिहासिक मानकों के हिसाब से यह अभी भी तेज बनी हुई है।

इनपुट स्टॉक और तैयार माल में हुई वृद्धि

कंपनियों ने एशिया, यूरोप, पश्चिम एशिया और अमेरिका के ग्राहकों से नया काम हासिल करने की सूचना दी। रिपोर्ट में इन्वेंट्री और मूल्य निर्धारण के रुझानों पर भी प्रकाश डाला गया।इनपुट स्टॉक में एक बार फिर वृद्धि हुई। वहीं तैयार माल के स्टॉक में नौ महीनों में पहली बार वृद्धि हुई, जिससे लंबे समय से चली आ रही कमी का दौर समाप्त हुआ।

उत्पादन को पांच वर्षों में सबसे मजबूत विस्तार

अगस्त में लागत दबाव बना रहा, बियरिंग, चमड़ा, खनिज, स्टील और छोटे इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों जैसी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इनपुट लागत मुद्रास्फीति की समग्र दर मध्यम रही और अपने दीर्घकालिक औसत से नीचे रही। इसके विपरीत, मजबूत मांग की स्थिति के कारण, बिक्री शुल्क में तेज वृद्धि हुई। कुल मिलाकर, एचएसबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने अगस्त में अपनी वृद्धि जारी रखी, जिसमें मांग में मजबूती, विज्ञापन की सफलता और आपूर्ति-मांग संरेखण ने उत्पादन को लगभग पांच वर्षों में सबसे मजबूत विस्तार दिया।

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