जुलाई में आईएचएस मार्किट इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) 55.3 अंक हो गया। यह पिछले तीन महीनों में सबसे मजबूत वृद्धि दर है। एक मासिक सर्वेक्षण के अनुसार इससे पिछले महीने जून में यह 48.1 अंक पर था। मांग में सुधार और कोरोना वायरस महामारी के स्थानीय प्रतिबंधों में ढील से जुलाई 2021 में भारत के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में वृद्धि दर्ज की गई है।
संकुचन को दर्शाता है 50 से नीचे का अंक
मालूम हो कि पीएमआई के तहत, 50 से अधिक अंक का अर्थ गतिविधियों में विस्तार होता है, वहीं 50 से नीचे का अंक संकुचन को दर्शाता है। इस संदर्भ में आईएचएस मार्किट में अर्थशास्त्र की संयुक्त निदेशक पोलीन्ना डी लीमा ने कहा कि, 'भारत ता विनिर्माण उद्योग जून में हुई गिरावट से उबरता हुआ दिखआ दिया। इस दौरान उत्पादन में तेज गति से बढ़त आई। वहीं एक तिहाई से भी ज्यादा कंपनियों ने मासिक उत्पादन में बढ़ोतरी की बात कही।'
कैलेंडर वर्ष 2021 में 9.7 फीसदी की वार्षिक वृद्धि की उम्मीद
कैलेंडर वर्ष 2021 के दौरान औद्योगिक उत्पादन में 9.7 फीसदी की वार्षिक वृद्धि की उम्मीद है। रोजगार की बात करें, तो इस पर डी लीमा ने कहा कि जुलाई में रोजगार के मोर्चे पर हालात में थोड़ा सुधार देख गया है। लेकिन इस संदर्भ में कुछ भी ठोस कहना अभी जल्दबाजी होगी।
जुलाई 2020 के बाद जून में आया था 50 अंक से नीचे
जून में यह सूचकांक जुलाई 2020 के बाद पहली बार 50 अंक से नीचे गिर गया था। तब ताजा व्यापार आशावाद में कमी आई थी, साथ ही लोगों का बेरोजगारी का भी सामना करना पड़ा था। मार्च 2022 में खत्म हो रहे मौजूदा वित्त वर्ष के लिए बजट अनुमान हैं कि नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 14.4 फीसदी रह सकती है। दूसरी और आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के अनुसार भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 9.5 फीसदी रहने का अनुमान है। पहले यह 10.5 फीसदी रहने का अनुमान था। यह गिरावट दूसरी लहर की वजह से हुई।
इलेक्ट्रॉनिक डाटा इंटरचेंज (ईडीआई) और एसईजेड के अनुसार 22 से 31 जुलाई 2021 तक 12.69 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जो 2020-21 की समान अवधि से 53.09 फीसदी (8.29 अरब डॉलर) ऊपर है। 2019-20 की समान अवधि से यह 52.70 फीसदी (8.31 अरब डॉलर) अधिक है।