अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि भारत ने जी-20 की प्राथमिकताओं पर प्रगति की दिशा में बहुत सक्रिय रुख अपनाया है और इसकी अध्यक्षता की प्रमुख प्राथमिकताएं वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं के लिए वित्तपोषण बढ़ाना और वृहद आर्थिक समन्वय को मजबूत करना है। भारत ने 1 दिसंबर, 2022 को जी 20 की सालभर की अध्यक्षता संभाली थी और देश भर के शहरों में 200 से अधिक बैठकों और संबंधित कार्यक्रमों की मेजबानी कर रहा है। G20 या ग्रुप ऑफ 20 दुनिया की प्रमुख विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक इंटरगवर्मेंटल फोरम (अंतरसरकारी मंच) है। आईएमएफ संचार विभाग की निदेशक जूली कोजाक ने कहा, "जी 20 अध्यक्ष के रूप में भारत की प्रमुख प्राथमिकताएं वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं के लिए वित्तपोषण बढ़ाना व ऋण, बहुपक्षीय विकास बैंकों या एमडीडी में सुधार और डिजिटलीकरण सहित कई नीतिगत क्षेत्रों में व्यापक आर्थिक समन्वय को मजबूत करना है।"
कोजाक ने गुरुवार को यहां संवाददाताओं से कहा, 'भारत ने जी-20 की विभिन्न प्राथमिकताओं पर प्रगति की दिशा में बहुत सक्रिय रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि भारत की जी-20 अध्यक्षता एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य के विषय पर केंद्रित रही है। उन्होंने कहा, 'कर्ज के मामले में भारत ने कर्ज की कमजोरियों को समझने और उनका समाधान करने की दिशा में ठोस प्रगति की है, जिसमें जीएसडीआर (वैश्विक संप्रभु ऋण गोलमेज सम्मेलन) की सह-अध्यक्षता करना शामिल है। उन्होंने कहा इस बारे में हमने अभी बात की है। हमारे लक्ष्यों में कमजोर और कम आय वाले देशों को ऋण राहत के लिए बहुत महत्वपूर्ण सामान्य ढांचे के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने में आम सहमति बनाने में मदद करना शामिल है।'
आईएमएफ ने पाकिस्तान को दी गई मदद पर कहा- इससे हालात बदलेंगे
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि हाल ही में मंजूर तीन अरब डॉलर के ऋण कार्यक्रम से पाकिस्तान को काफी राहत मिलेगी क्योंकि इससे नकदी संकट से जूझ रहे देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के उसके तत्काल प्रयासों में मदद मिलेगी और यह सुनिश्चित होगा कि भुगतान संतुलन की मौजूदा जरूरतें पूरी हों। एक मीडिया रिपोर्ट में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई। वाशिंगटन स्थित वैश्विक ऋणदाता ने जून के अंत में पाकिस्तान के साथ एक स्टैंड-बाय समझौते पर हस्ताक्षर किए, ताकि देश को नौ महीने की अवधि के लिए अल्पकालिक ऋण प्रदान किया जा सके। आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने बुधवार को औपचारिक रूप से तीन अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम को मंजूरी दे दी।
आईएमएफ ने एक बयान में कहा कि बोर्ड ने 2.25 अरब डॉलर के विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) के लिए देश के लिए बेलआउट पैकेज को मंजूरी दे दी है, जो संस्थान अपने सदस्य देशों के खातों में जमा करता है। मीडिया रिपोर्ट्स में आईएमएफ की प्रवक्ता जूली कोजाक के हवाले से कहा गया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकार की आर्थिक स्थिरीकरण योजना और नीतियों का समर्थन करना था, जिसमें सबसे कमजोर लोगों के लिए उचित सुरक्षा और बहुपक्षीय और द्विपक्षीय भागीदारों से वित्तपोषण के लिए एक ढांचा प्रदान करना था।