हरदीप पुरी ने भारत की ईंधन जरूरतों की समीक्षा के लिए बुलाई बैठक
- फोटो : एएनआई
ईरान-इस्राइल संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतों में उछाल की आशंका
बता दें कि पश्चिम एशिया में इस्राइल और ईरान के बीच लगातार बढ़ते संघर्ष के कारण भारत समेत पूरी दुनिया में ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका है। टकराव से न सिर्फ भारत के निर्यात समेत वैश्विक व्यापार पर असर पड़ रहा है, बल्कि हवाई और समुद्री माल ढुलाई दरों के साथ बीमा शुल्क में भी बढ़ोतरी का भी जोखिम है। निर्यातकों का कहना है कि इस युद्ध के कारण यूरोप और रूस जैसे देशों को भारत का निर्यात प्रभावित हो सकता है।
ये भी पढ़ें- Crude Oil Price: पश्चिम एशिया संकट से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, भारतीय तेल और गैस कंपनियों पर बढ़ा दबाव
कच्चा तेल आयात के बिल में आई कमी
- फोटो : पीटीआई
व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होगी
अगर युद्ध लंबे समय तक चलता रहा, तो ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एवं लाल सागर जैसे मार्गों के जरिये व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होगी।फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा, वैश्विक व्यापार की स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही थी, जो ईरान-इस्राइल तनाव बढ़ने से फिर से प्रभावित होगी।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी
- फोटो : ANI
व्यापारियों को उठाना पड़ेगा बोझ
वहीं, मुंबई स्थित निर्यातक एवं टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज के संस्थापक अध्यक्ष एसके सराफ ने कहा, मालवाहक जहाज धीरे-धीरे लाल सागर के मार्गों पर लौट आए हैं। इससे भारत और एशिया के अन्य हिस्सों से अमेरिका एवं यूरोप जाने में 15-20 दिन की बचत हो रही है। इस युद्ध के कारण मालवाहन जहाज अब फिर से लाल सागर मार्ग का इस्तेमाल करने से बचेंगे। सराफ ने आगे कहा, ईरान और इस्राइल के बीच युद्ध अगर एक सप्ताह से अधिक समय तक चलत रहा, तो माल ढुलाई की लागत करीब 50 फीसदी तक बढ़ जाएगी, जिसका बोझ व्यापारियों को उठाना पड़ेगा। भारत के व्यापार पर असर पड़ेगा, क्योंकि दोनों देश हमारे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार के लिए भी स्थिति काफी कठिन हो जाएगी।
ये भी पढ़ें- West Asia Unrest Aftermath: ईरान-इस्राइल युद्ध से वैश्विक व्यापार पर असर, 50% बढ़ जाएगी माल ढुलाई लागत
संबंधित वीडियो