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India-EU Trade: आज से शुरू होगी व्यापार समझौते पर अगले दौर की वार्ता, दिसंबर तक बातचीत पूरी करने की होगी कोशिश

Mon, 06 Oct 2025 10:39 AM IST
पवन पांडेय बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

India-EU Free Trade Agreement: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर ब्रसेल्स में दोनों ओर के बड़े अधिकारी 14वें चरण की वार्ता शुरू करेंगे, जो पांच दिन चलेगी। वहीं केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल छह अक्तूबर को दो दिवसीय यात्रा पर दोहा जाएंगे।
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भारत और यूरोपीय संघ। (प्रतीकात्मक तस्वीर)) - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर बातचीत अब अहम दौर में पहुंच गई है। सोमवार से ब्रसेल्स में दोनों ओर के बड़े अधिकारी 14वें चरण की वार्ता शुरू करेंगे, जो पांच दिन चलेगी। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा था कि भारत और ईयू के बीच एफटीए पर समझौता जल्द हो सकता है। वह इस महीने के आखिर में दक्षिण अफ्रीका में ईयू के व्यापार आयुक्त मारोस सेफकोविक से मिलेंगे, ताकि अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की जा सके। दोनों पक्षों का लक्ष्य है कि दिसंबर तक बातचीत पूरी कर ली जाए।
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आठ साल बाद एफटीए पर दोबारा बातचीत
भारत व ईयू ने जून 2022 में आठ साल बाद एफटीए पर बातचीत दोबारा शुरू की थी। एफटीए वार्ता में कुल 23 क्षेत्र कवर किए जा रहे हैं, जिनमें वस्तुओं व सेवाओं का व्यापार, निवेश, तकनीकी रुकावटें, सीमा शुल्क, सरकारी खरीद, विवाद निपटान, बौद्धिक संपदा अधिकार और सतत विकास जैसे मुद्दे शामिल हैं।
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पीयूष गोयल आज से दो दिवसीय दोहा यात्रा पर
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल छह अक्तूबर को दो दिवसीय यात्रा पर दोहा जाएंगे।  इस दौरान गोयल कतर-भारत संयुक्त व्यापार और वाणिज्य आयोग की बैठक में भाग लेंगे। इसकी सह-अध्यक्षता कतर के वाणिज्य और उद्योग मंत्री शेख फैसल बिन थानी बिन फैसल अल थानी करेंगे। पीयूष गोयल के साथ इस यात्रा में अलग-अलग मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी और एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी है। इस दौरान दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार की समीक्षा करेंगे, मौजूदा व्यापारिक बाधाओं और गैर-शुल्कीय समस्याओं पर चर्चा करेंगे और निवेश व व्यापार को बढ़ाने के नए रास्ते तलाशेंगे।
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ईयू से क्या चाहता है भारत?
ईयू चाहता है कि भारत कारों और मेडिकल उपकरणों पर लगने वाला आयात शुल्क कम करे। इसके अलावा वाइन, शराब, मांस और चिकन जैसे उत्पादों पर भी टैक्स घटाए और बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) कानून को और सख्त बनाए। भारत की मांग है कि उसके कपड़े, दवाइयां, स्टील, पेट्रोलियम उत्पाद और इलेक्ट्रिकल मशीनरी जैसे सामानों को यूरोपीय बाजार में ज्यादा मौके और प्रतिस्पर्धा का फायदा मिले।
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