रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2000 से 2022 के बीच प्रति व्यक्ति आय 442 डॉलर से बढ़कर 2,389 डॉलर हो गई। जबकि, 2004 और 2019 के बीच, गरीबी दर (प्रति दिन 2.15 अमरीकी डालर के अंतरराष्ट्रीय गरीबी माप के आधार पर) 40 से 10 प्रतिशत तक गिर गई।
भारत उच्च आय और आर्थिक असमानता वाले शीर्ष देशों में शामिल है लेकिन बहुआयामी गरीबी में रहने वाली आबादी का हिस्सा 2015-16 और 2019-21 के बीच 25 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत रह गया है। सोमवार को जारी 2024 एशिया पैसिफिक ह्युमन डेवलपमेंट रिपोर्ट के अनुसार भारत के बारे में दीर्घकालिक प्रगति की एक अच्छी तस्वीर पेश की गई है, लेकिन साथ ही इसमें निरंतर असमानता और व्यापक व्यवधान की भी बात कही गई है।
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रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2000 से 2022 के बीच प्रति व्यक्ति आय 442 डॉलर से बढ़कर 2,389 डॉलर हो गई। जबकि, 2004 और 2019 के बीच, गरीबी दर (प्रति दिन 2.15 अमरीकी डालर के अंतरराष्ट्रीय गरीबी माप के आधार पर) 40 से 10 प्रतिशत तक गिर गई।
'मेकिंग अवर फ्यूचर: एशिया एंड द पैसिफिक में मानव विकास के लिए नई दिशाएं' शीर्षक वाली नई रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि अधूरी आकांक्षाएं, बढ़ी हुई मानवीय असुरक्षा और संभावित रूप से अधिक अशांत भविष्य बदलाव की तत्काल जरूरत पैदा करते हैं।
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इसके अलावा, 2015-16 और 2019-21 के बीच, बहुआयामी गरीबी में रहने वाली आबादी का हिस्सा 25 से 15 प्रतिशत तक गिर गया। इन सफलताओं के बावजूद, गरीबी लगातार उन राज्यों में केंद्रित है जो देश की 45 प्रतिशत आबादी का घर हैं, लेकिन इन राज्यों में करीब 62 प्रतिशत गरीब रहते हैं। इसके अलावा, कई अन्य लोग बहुत कमजोर हैं, जो गरीबी रेखा से ठीक पास हैं।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि गरीबी में वापस जाने की जोखिम वाले समूहों में महिलाएं, अनौपचारिक श्रमिक और अंतर-राज्य प्रवासी शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रम बल में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 23 प्रतिशत है और तीव्र वृद्धि लेकिन लगातार असमानता के बीच आय का वितरण अधिक विषम हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, "मुख्य रूप से 2000 के बाद की अवधि में संपत्ति असमानता में मजबूत वृद्धि के सबूत बढ़ रहे हैं।"