प्रमुख वैश्विक पुनर्बीमा कंपनी स्विस रे की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में जलवायु से जुड़ी आपदाओं के कारण बीमित नुकसान की राशि 14,500 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। यह संभावित क्षति 2024 के बीमित नुकसान (13,700 करोड़ डॉलर) की तुलना में करीब 6 फीसदी अधिक है।
प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता और आवृत्ति में बढ़ोतरी बीमा उद्योग के लिए गंभीर सिरदर्द बनती जा रही है। प्रमुख वैश्विक पुनर्बीमा कंपनी स्विस रे की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में जलवायु से जुड़ी आपदाओं के कारण बीमित नुकसान की राशि 14,500 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। यह संभावित क्षति 2024 के बीमित नुकसान (13,700 करोड़ डॉलर) की तुलना में करीब 6 फीसदी अधिक है।
विज्ञापन
रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े देखें तो आपदाओं से होने वाला बीमित नुकसान सालाना 5 से 7 फीसदी की दर से बढ़ रहा है जो न केवल बीमा कंपनियों के लिए बल्कि वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए भी खतरे की घंटी है। यदि यही हालात रहे तो 1990 के बाद दूसरा सबसे बड़ा वार्षिक बीमा नुकसान होगा। हालांकि 2017 में आए तूफानों हार्वे, इरमा और मारिया ने अब तक का सबसे बड़ा झटका दिया था। स्विस रे के आपदा जोखिम मॉडल के अनुसार 2025 में बीमा दावों का आंकड़ा 30,000 करोड़ डॉलर तक भी पहुंच सकता है, हालांकि इसकी संभावना करीब 10 फीसदी मानी जा रही है।
2024 सबसे बड़े बीमा दावों का वर्ष
प्राकृतिक आपदाओं के कारण वैश्विक स्तर पर 2024 में 31,800 करोड़ डॉलर का कुल आर्थिक नुकसान हुआ, परंतु इसमें से केवल 57 फीसदी यानी 18,100 करोड़ डॉलर की ही भरपाई बीमा द्वारा हो सकी। बचा हुआ नुकसान असुरक्षित रहा, जिससे स्पष्ट है कि अब भी बड़ी संख्या में व्यक्ति और व्यवसाय बीमा सुरक्षा से वंचित हैं। 2024 में तूफान हेलेन और मिल्टन ने भारी तबाही मचाई। अमेरिका में भीषण बवंडरों, वैश्विक शहरी बाढ़ और कनाडा में अब तक के सबसे बड़े बीमा दावों ने इस वर्ष को बीमा इतिहास में विशेष बना दिया।
अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में पॉलिसी जारी करने से कतराने लगीं बीमा कंपनियां
रिपोर्ट के अनुसार चरम मौसमी घटनाओं के कारण बीमा उद्योग की रणनीति में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। अब कंपनियां अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में पॉलिसी जारी करने से कतराने लगी हैं। उदाहरण के लिए लॉस एंजेल्स में 2024 की जंगल की भयंकर आग ने 23,000 हेक्टेयर क्षेत्र को खाक कर दिया। इसमें 29 जानें गईं और 16,000 से अधिक संरचनाएं तबाह हो गईं। इसके कारण कैलिफोर्निया की लगभग दर्जनभर प्रमुख बीमा कंपनियों ने नई पॉलिसियां देना या तो बंद कर दिया या उन पर सख्त शर्तें लगा दीं।