भारत के लिए निर्यात का सबसे बड़ा बाजार रहा है अमेरिका।
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अब सवाल यह है कि प्रधानमंत्री मोदी को भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर इतना भरोसा क्यों है? आइए जानते हैं वो छह वजहें, जिनकी वजह से भारत मानता है कि वह टैरिफ का वार झेल सकता है।
1. भारतीय बाजार की विश्वसनीयता
भारतीय बाजार पर पिछले कुछ वर्षों में विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार है। इस बीच, तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही है। हाल ही में अमेरिका की ही रेटिंग एजेंसियों एसएंडपी और फिच ने भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में सकारात्मक टिप्पणियां की है। फिच का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ बढ़ने का भारत की जीडीपी पर असर मामूली रहेगा, क्योंकि अमेरिका को भारत का निर्यात कुल जीडीपी का लगभग 2 फीसदी ही है। फिच ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि 6.5 प्रतिशत रहेगी। दूसरी ओर, एसएंडपी ग्लोबल ने 18 साल बाद भारत की रेटिंग बढ़ाकर 'बीबीबी-' से 'बीबीबी' कर दी है और कहा है कि भारत कोविड के बाद सबसे मज़बूत और तेज़ी से उभरने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
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2. भारत के घरेलू बाजार का बड़ा आकार
मैकिन्से ग्लोबल इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक 2050 तक दुनिया की कुल खपत में भारत की हिस्सेदारी बढ़कर 16 प्रतिशत हो सकती है। 2023 में यह सिर्फ 9 प्रतिशत थी। आने वाले समय में युवा आबादी और मजबूत उपभोक्ता वर्ग की वजह से भारत का घरेलू बाजार वैश्विक स्तर पर बड़ी भूमिका निभा सकता है। यही कारण है कि भारत टैरिफ जैसे बाहरी झटकों को भी झेलने की क्षमता रखता है।
3. जीएसटी कलेक्शन व इससे जुड़े कानूनों में सुधार
भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक मई 2025 में देश का जीएसटी कलेक्शन 16.4 फ़ीसदी बढ़कर 2,01,050 करोड़ रुपये पहुंच गया। मई 2024 में यह कलेक्शन 1,72,739 करोड़ रुपये था। इससे पहले अप्रैल 2025 में जीएसटी कलेक्शन 2.37 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड कलेक्शन हुआ। जीएसटी कलेक्शन के मजबूत आंकड़े घरेलू मोर्चे पर भारतीय अर्थव्यवस्था मज़बूती से आगे बढ़ रही है। एशियन डेवलपमेंट बैंक की जुलाई 2025 की रिपोर्ट भी कहती है कि घरेलू मांग, अच्छे मानसून और ब्याज दरों में कमी से विकास दर 6.5 फ़ीसदी तक रहेगी। इसके अलावे, 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाककिले से जीएसटी कानूनों में सुधार का दावा किया है। सरकार ने उसके जीएसटी के मौजूदा स्लैब को घटाने का प्रस्ताव जीएसटी परिषद को दिया है। ये बदलाव अमल में आए तो देश के मध्यम वर्ग पर जीएसटी का बोझ कम होने का अनुमान है। इससे घरेलू बाजार में मांग बढ़ सकती है और हम अमेरिका को होने वाले निर्यात का नुकसान इससे पाट सकते हैं।
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4. महंगाई को काबू रखने में सफल केंद्रीय बैंक
एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल भारत में खुदरा महंगाई दर घटकर 1.55 फीसदी पर आ गई है। यह पिछले आठ साल का सबसे निचला स्तर है। जून में यह 2.1 फ़ीसदी थी। एडीबी का अनुमान है कि 2025 में महंगाई 3.8% और 2026 में 4% पर रहेगी। महंगाई के अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक को सरकार की ओर से मिले लक्ष्य के दायरे में है। खाद्य वस्तुओं की कीमतें कम होने से उपभोक्ताओं को राहत मिली है और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। महंगाई कंट्रोल में रखने से देश की अर्थव्यवस्था को टैरिफ से होने वाले नुकसान को थामने में मदद मिलेगी।
5. पूंजीगत निवेश पर जोर
चीन जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए भारत लगातार पूंजीगत निवेश को बढ़ावा दे रहा है। सरकार ने समय-समय पर के देश के कॉरपोरेट जगत से भी पूंजीगत निवेश बढ़ाने की अपील की है। फरवरी 2025 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इससे जुड़े बड़े एलान किए। उन्होंने पूंजीगत निवेश के मद में राज्यों को बिना ब्याज के डेढ़ लाख करोड़ रुपये का कर्ज मुहैया कराने की बात कही ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत किया जा सके। अगर भारत पूंजीगत निवेश के जरिए अपनी आधारभूत संरचना में सकारात्मक बदलाव लाने में सफल रहता है तो, इससे हमें अमेरिका के टैरिफ के झटकों से भी निपटने में मदद मिलेगी।
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6. भारत की संघर्षशीलता
ऐसे तो अमेरिका की ओर से लगाया गया 50 फीसदी टैरिफ भारत के लिए निश्चित रूप से एक बड़ा झटका है। लेकिन विदेशी एजेंसियों की रेटिंग, घरेलू बाजार की क्षमता, जीएसटी कलेक्शन, महंगाई में नरमी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते निवेश जैसी वजहें भारत को भरोसा देती हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था इन बाहरी दबावों का सामना कर सकती है। भारत को जब-जब दुनिया ने अकड़ दिखाने की कोशिश की है, हम और मजबूत बनकर उभरे हैं। इसका कारण है भारतीय संस्कृति में रची-बसी संघर्षशीलता। जिसके बूते हम हर चुनौती निपटकर फिर उठ खड़े होते हैं। वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध हो, 1991 में देश के दिवालिया होने की नौबत हो, 2008 में वैश्विक मंदी का दौर हो या 2020-21 का कोविड का भयावह दौर, हम हर चुनौती से मजबूती के साथ निपटते रहे हैं। इसलिए हमें भरोसा है कि हम अमेरिका के बेतुके टैरिफ को भी उसी जज्बे के साथ बेअसर कर देंगे। इस बीच, सरकार से जुड़े सूत्रों का दावा है कि टैरिफ मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत और अमेरिका के बीच संचार चैनल खुले हुए हैं और बातचीत हो रही है।