कोलकाता, बंगलूरू और मुंबई में सीबीआई ने शनिवार को 12 ठिकानों पर छापेमारी की। एजेंसी ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर छह अलग-अलग मामलों में दर्ज एफआईआर के आधार पर उठाया है। आरोप है कि बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों ने मिलकर घर खरीदारों को धोखा दिया और उनसे ठगी की।
अधिकारियों के अनुसार, सीबीआई बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों के बीच इस कथित गठजोड़ की जांच कर रही है। दरअसल, घर खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि न केवल उन्हें बिल्डरों और डेवलपर्स ने धोखा दिया, बल्कि वित्तीय संस्थानों ने उनके खिलाफ जबरन वसूली जैसी कार्रवाई भी की।
सीबीआई के प्रवक्ता ने एक बयान में बताया कि अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने एजेंसी को सात प्रारंभिक जांच दर्ज करने का निर्देश दिया था। दरअसल, घर खरीदारों को ठगने के लिए 'सबवेंशन स्कीम' के नाम पर होम लोन की नई योजनाएं पेश की गई थीं। शीर्ष अदालत ने इसे अनुचित और भ्रामक तरीका मानते हुए सीबीआई को जांच का आदेश दिया।
दिन के एक अन्य अहम घटनाक्रम में सीबीआई ने महाराष्ट्र में सरकारी कर्मचारी को गिरफ्तार किया। आरोपी राजेंद्र रावत PESO (नवी मुंबई) के संयुक्त मुख्य नियंत्रक हैं। सीबीआई ने उन्हें 9 लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। PESO देश में खतरनाक पदार्थों की सुरक्षा नियमों को लागू करने वाली केंद्रीय एजेंसी है। जांच के दौरान एजेंसी ने लगभग 26 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। CBI ने आरोप लगाया कि रावत निजी सलाहकारों और एजेंटों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर भ्रष्ट गतिविधियों में लिप्त थे। सुनवाई के दौरान पता चला कि एक व्यक्ति (राहुल बचाते) रावत के घर पर 9 लाख रुपये की रिश्वत देने आया था, जिसे रावत की पत्नी ने स्वीकार किया। इसके अलावा, उनके कार्यालय और वाहन से 8 लाख रुपये और 1.5 लाख रुपये की अन्य रिश्वत भी बरामद की गई। अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। CBI ने इस कार्रवाई के लिए एक सूचना के आधार पर जाल बिछाया और रावत की कथित अवैध गतिविधियों को उजागर किया।