सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख खनन कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड से जुड़ी एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। एक सरकारी कंपनी (केंद्र) होने के बावजूद झारखंड सरकार के खान व भूविज्ञान विभाग ने कंपनी को कथित तौर पर बिना वैध मंजूरी के उत्पादन करने के आरोप में 929 रुपये करोड़ से अधिक का भारी-भरकम डिमांड नोटिस थमा दिया है। शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में कंपनी ने इस नोटिस की पुष्टि की है।
क्या है पूरा मामला?
हिंदुस्तान कॉपर द्वारा स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के अनुसार, यह नोटिस पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के जिला खनन कार्यालय (डीएमओ) द्वारा जारी किया गया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने सुरदा खदान से बिना वैध वैधानिक मंजूरी के या स्वीकार्य सीमा से अधिक तांबे का उत्पादन किया है।
मांग की गई कुल राशि 929,40,06,242 रुपये (नौ सौ उनतीस करोड़, चालीस लाख, छह हजार, दो सौ बयालीस रुपये) है। यह नोटिस मुआवजे की वसूली के रूप में भेजा गया है। 17 साल पुराना है विवाद यह मामला हाल-फिलहाल का नहीं, बल्कि करीब दो दशक पुराना है। 12 फरवरी को प्राप्त नोटिस के अनुसार, कथित उल्लंघन की अवधि वित्तीय वर्ष 2000-01 से 2016-17 के बीच की है। झारखंड सरकार ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21(5) के तहत यह देनदारी तय की है। इस कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध 'कॉमन कॉज' फैसले का हवाला दिया गया है, जो अवैध खनन और पर्यावरण मंजूरी से संबंधित है।
कंपनी ने क्या प्रतिक्रिया दी है?
हिंदुस्तान कॉपर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी ने कहा है कि वह इस डिमांड नोटिस के खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाएगी। एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने साफ किया है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति, परिचालन या अन्य गतिविधियों पर इसका प्रभाव अंतिम आदेश की सीमा तक ही सीमित रहेगा।
एक सरकारी कंपनी पर राज्य सरकार की ओर से इतनी बड़ी राशि का जुर्माना लगाना कॉर्पोरेट गवर्नेंस और नियामक अनुपालन के लिहाज से गंभीर मामला है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर होगी कि कंपनी इस पुराने विवाद को कानूनी तौर पर कैसे सुलझाती है, क्योंकि ₹900 करोड़ से अधिक की देनदारी कंपनी की बैलेंस शीट पर दबाव डाल सकती है।