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Mumbai: अनिल अंबानी-आरकॉम को हाईकोर्ट से झटका, खातों को 'धोखाधड़ी' में वर्गीकृत करने वाला एसबीआई का आदेश वैध

Tue, 07 Oct 2025 09:11 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Mumbai: न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने 3 अक्तूबर को एसबीआई के आदेश को चुनौती देने वाली अंबानी की याचिका खारिज कर दी थी। फैसले की एक प्रति मंगलवार को सामने आई। इसमें क्या कहा गया है, आइए जानते हैं विस्तार से।
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अनिल अंबानी - फोटो : PTI
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने उद्योगपति अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के खातों को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत करने वाले भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा है कि यह एक तर्कसंगत आदेश था और इसमें कोई कानूनी खामी नहीं थी।

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न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने 3 अक्तूबर को एसबीआई के आदेश को चुनौती देने वाली अंबानी की याचिका खारिज कर दी थी। फैसले की एक प्रति मंगलवार को सामने आई। इसमें कहा गया कि अंबानी की याचिका में कोई दम नहीं है, क्योंकि 13 जून 2025 के एसबीआई आदेश में कोई "खामी" नहीं थी। अदालत ने उद्योगपति की इस दलील पर विचार नहीं किया कि आदेश को अमान्य घोषित किया जाना चाहिए। अंबानी ने अपनी याचिका में दलील थी कि उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया और प्रासंगिक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए।

हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मास्टर निर्देशों के तहत उपलब्ध अधिकार, जिसके तहत एसबीआई ने अपना आदेश पारित किया, प्रतिनिधित्व करने का है, न कि व्यक्तिगत सुनवाई का।
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अदालत ने कहा कि अंबानी ने पिछले साल एसबीआई की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब दे दिया था और जब अंतिम पत्र का कोई जवाब नहीं आया तो बैंक ने खाते को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत करने का आदेश पारित कर दिया। अदालत ने यह भी कहा कि अंबानी ने कभी भी व्यक्तिगत सुनवाई के लिए कोई अनुरोध नहीं किया।

अदालत ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को एक निश्चित सूत्र में लागू नहीं किया जा सकता। साथ ही, अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में अंबानी को लिखित रूप में अपनी आपत्तियां प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था। अदालत ने कहा, "इसलिए, निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अनुपालन की आवश्यकता पूरी हो गई है।"

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "जिस अधिकार पर विचार किया जा रहा है, वह प्रतिनिधित्व का अधिकार है, जरूरी नहीं कि वह व्यक्तिगत सुनवाई का अधिकार हो।" एसबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस पर ऋण की शर्तों का उल्लंघन करते हुए लेनदेन करके बैंक निधियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। बैंक ने इस वर्ष की शुरुआत में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में भी शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद एजेंसी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और अनिल अंबानी के आवास से जुड़े परिसरों की तलाशी ली थी। केंद्रीय एजेंसी ने एसबीआई की ओर से रिलायंस कम्युनिकेशंस और अनिल अंबानी द्वारा कथित गबन के कारण  2,929.05 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा करने के बाद शिकायत दर्ज की थी।

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