देश की अर्थव्यवस्था को अच्छी मदद मिलने की उम्मीद है। इस साल राहत के तमाम उपाय शुरू होने से त्योहार के तीन महीने के खर्च में 12 से 14 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि होने की उम्मीद है। सोने और शराब जैसी कुछ वस्तुओं को इस खर्च में शामिल नहीं किया गया है। खर्च का बड़ा हिस्सा शादी-विवाह पर होगा। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार,कपड़ों, ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी वस्तुओं पर भी लोग दिल खोलकर खर्च करेंगे।
टैरिफ संबंधी अनिश्चितताओं के कारण बाहरी मोर्चे पर चुनौतियां हैं। फिर भी भारत एक घरेलू उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जो इसे बाहरी चुनौतियों से काफी हद तक बचाए रखती है। बढ़ती खपत और उपहार देने के उद्देश्य से एफएमसीजी और क्विक सर्विस रेस्तरां (क्यूएसआर) क्षेत्रों को भी लाभ होने की संभावना है। विमानन और रेलवे जैसे अन्य क्षेत्रों में भी मांग में वृद्धि होगी। ये अनुमान वास्तविक खपत को दर्शाते हैं। ये विकास को गति देंगे।
टैरिफ व वैश्विक अनिश्चितताओं से अर्थव्यवस्था पर दबाव, लंबे समय से मांग दबी है। लोग खरीदारी से बच रहे हैं।
जीएसटी कटौती के इंतजार में लोगों ने खरीदी रोकी, अब इस खर्च से तीसरी तिमाही की जीडीपी में वृद्धि होगी।
अक्तूबर-दिसंबर, 2024 मेें खाद्य और किराना सेगमेंट में 14%, क्यूएसआर में 10 और आभूषणों की बिक्री 9% बढ़ी थी। ये वही सेगमेंट हैं जिन पर जीएसटी दर में कटौती का सबसे अधिक ध्यान दिया गया। प्रमुख त्योहारों में दशहरा, दिवाली और क्रिसमस हैं। शादियों का मौसम नवंबर से शुरू होगा। हाल में ई-कॉमर्स सहित ऑनलाइन वृद्धि के साथ शहरी और टियर-2 व टियर-3 शहरों में रेडीमेड परिधान व्यवसाय तेजी से बढ़ा है। लोगों के खर्च करने का व्यवहार जरूरत आधारित से जीवनशैली आधारित हो गया है। इससे खर्च में वृद्धि होने की संभावना है।
ऑटोमोबाइल, रिकॉर्ड बिक्री की उम्मीद...वाहन निर्माता और डीलर नई कीमतों की घोषणा कर चुके हैं। स्मार्टफोन-लैपटॉप पर दरें नहीं घटी हैं। फिर भी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सेल से तेजी आने की उम्मीद। टीवी, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर और एसी जैसी वस्तुओं की खरीदी त्योहारों में ज्यादा होती है। रेस्टोरेंट/ऑनलाइन ऑर्डर डाइन-इन और ऑनलाइन खाने के ऑर्डर्स में वृद्धि होगी। ऑनलाइन क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी इस दौरान ऑर्डर्स में बढ़ोतरी देखी गई है। मिठाइयां, 40,000 से 45,000 करोड़ का होगा कारोबार। इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, दरें नहीं घटने पर भी बिक्री जमकर बढ़ी। घरेलू सामान, त्योहारों का लंबे समय से रहता है इंतजार।
शादियां 4,50,000-5,00,000