वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा बजट पेश कर रही हैं। इस बजट की प्रक्रिया एक हलवा सेरेमनी से शुरू होती है। लेकिन, क्या आपने कभी सुना है कि हलवा खाने के तुरंत बाद 100 से ज्यादा लोगों को एक बेसमेंट में बंद कर दिया जाए? सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लगती है, लेकिन वित्त मंत्रालय में बजट तैयार होने यानी उसकी छपाई से ठीक पहले ठीक यही होता है। यह सिर्फ एक 'मीठी रस्म' नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े 'सीक्रेट मिशन' यानी बजट की प्रक्रिया का हिस्सा है। बजट तैयार होने की प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले एक हलवा सेरेमनी होती है, उसके बाद इसे तैयार करने वाले सभी अधिकारी और कर्मचारी 'लॉक इन' हो जाते हैं। उसका संपर्क दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट जाता है।
भारत में हर अच्छे काम की शुरुआत मीठे से करने की परंपरा है। यही कारण है कि संसद में बजट पेश होने (1 फरवरी) से कुछ दिन पहले वित्त मंत्रालय में एक बड़ी कड़ाही में हलवा बनाया जाता है। परंपरा के मुताबिक, वित्त मंत्री खुद कड़ाही में हलवा तैयार करवाती हैं और अपने अधिकारियों को परोसती हैं। यह उन अधिकारियों की मेहनत का सम्मान है जो बजट तैयार करने के लिए अपना दिन-रात एक कर देते हैं। लेकिन असली कहानी हलवा की मिठास के बाद शुरू होती है...
हलवा सेरेमनी का रस्म खत्म होते ही बजट प्रक्रिया का 'लॉक-इन पीरियड' शुरू हो जाता है। नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में स्थित प्रिंटिंग प्रेस में 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी 'लॉक' हो जाते हैं।