यूरोप और ब्रिटेन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से लेकर ओमान व पेरू जैसे कई छोटे देश भी भारत के तेजी से बढ़ते बाजार के कारण उसके साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) करना चाहते हैं। आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत के साथ एफटीए करने से ये देश कम या बिना किसी आयात शुल्क के बड़े खरीदारों वाले भारतीय बाजार तक पहुंच कायम कर सकते हैं। इससे उन देशों की कंपनियों को भारतीय बाजार में अपने उत्पादों की बिक्री करने में दूसरों के मुकाबले काफी बढ़त मिल सकती है।
बिना एफटीए वाले देशों से 75 फीसदी से ज्यादा आयात
भारत वर्तमान में अधिकतर आयात (75 फीसदी से अधिक) उन देशों से करता है, जिनसे उसका एफटीए नहीं है। इसलिए ये समझौते आकर्षक हैं क्योंकि वे भारत में महत्वपूर्ण नए बाजार अवसर प्रदान करते हैं।
बड़ी वजह, भारत में उच्च आयात शुल्क
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के साथ एफटीए की सबसे बड़ी वजह यहां का उच्च आयात शुल्क है। इस शुल्क की वजह से इन देशों के लिए भारत के बड़े व तेजी से बढ़ते बाजार तक पहुंच मुश्किल हो जाती है। जीटीआरआई के सह-संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ब्रिटेन का आयात शुल्क 4.1 फीसदी, कनाडा का 3.3 फीसदी व अमेरिका का 2.3 फीसदी है। वहीं, भारत का आयात शुल्क 12.6 फीसदी से अधिक है। ब्रिटेन व कनाडा को एफटीए से अधिक लाभ हो सकता है, क्योंकि वे भारत में अपने उत्पाद उन उच्च शुल्कों के बिना बेचने में सक्षम होंगे। हालांकि, भारत को प्रस्तावित एफटीए से निर्यात में बड़ी वृद्धि मिलने की उम्मीद कम है क्योंकि जिन देशों के साथ समझौते पर बातचीत कर रहा है, वहां पहले से ही आयात शुल्क कम है।