केंद्र सरकार ने प्याज के निर्यात और गेहूं के स्टॉक से जुड़े दो बड़े फैसले लिए हैं। प्याज निर्यात लागू न्यूनतम निर्यात शर्त को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। सरकार की ओर से एक अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी गई। मई 2024 में मोदी सरकार ने प्याज निर्यात पर प्रतिबंध हटा लिया था, लेकिन न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) 550 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तय किया था। अब प्रमुख घरेलू बाजारों में प्याज की कीमतें स्थिर हो गई हैं। वहीं, चुनावी राज्य महाराष्ट्र में, जहां प्याज की फसल प्रमुख रूप से उगाई जाती है, किसान एमईपी सीमा को हटाने की मांग कर रहे थे। माना जा रहा है कि इसी कारण सरकार ने यह फैसला लिया है।
केंद्र सरकार ने व्यापारियों और मिल मालिकों द्वारा रखे जाने वाले गेहूं के स्टॉक की सीमा को और कड़ा कर दिया है। सरकार ने यह कदम अनाज की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया है। सरकार के नए आदेश के अनुसार, व्यापारी अब अपने स्टॉक में 3,000 मीट्रिक टन के मुकाबले केवल 2,000 मीट्रिक टन गेहूं ही रख सकते हैं।
सरकार ने गेहूं प्रसंस्करणकर्ताओं (प्रोसेसर) के लिए स्टॉक-धारण सीमा भी कड़ी कर दी है। इसके आदेश में कहा गया है कि प्रोसेसर अब मासिक स्थापित क्षमता का 60 प्रतिशत हिस्सा वित्त वर्ष 25 के शेष महीनों से गुणा करके रख सकते हैं। पहले यह स्थापित क्षमता का 70 प्रतिशत था। प्रोसेसर इकाइयों में बिस्किट और ब्रेड बनाने वाली कंपनियां आती हैं। त्योहारों से पहले मजबूत मांग के कारण पिछले कुछ सप्ताहों में घरेलू बाजारों में गेहूं की कीमतें बढ़कर लगभग 2,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं।
सरकार ने शुक्रवार को कहा कि बासमती चावल पर 950 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) हटा दिया गया है। वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस कदम से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय बढ़ेगी।
भारतीय रिजर्व बैंक ने वैधानिक और नियामकीय अनुपालन में कुछ कमियों के लिए बीएनपी पारिबा पर 31.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। केंद्रीय बैंक ने अपने कुछ मानदंडों का पालन न करने के लिए हेवलेट पैकार्ड फाइनेंशियल सर्विसेज (इंडिया), एसएमएफजी इंडिया क्रेडिट कंपनी और मुथूट व्हीकल एंड एसेट फाइनेंस पर भी जुर्माना लगाया है।
एक बयान में रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंक बीएनपी पारिबा पर 'अग्रिमों पर ब्याज दर' के संबंध में जारी कुछ निर्देशों का पालन न करने के लिए जुर्माना लगाया गया है। बैंक के पर्यवेक्षी मूल्यांकन के लिए वैधानिक निरीक्षण 31 मार्च, 2023 तक इसकी वित्तीय स्थिति के संदर्भ में किया गया था। उसके बाद बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
रिजर्व बैंक ने कहा कि नोटिस पर बैंक के जवाब और सुनवाई के दौरान रखे गए पक्ष पर विचार करने के बाद उसने पाया कि बैंक के खिलाफ लगे आरोप सही थे जिसके लिए मौद्रिक जुर्माना लगाना उचित था। केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘‘बैंक कुछ ऋणों के संबंध में समान ऋण श्रेणी के भीतर एकसमान बाह्य मानक दर अपनाने में विफल रहा।’’
इसके अलावा रिजर्व बैंक ने हेवलेट पैकार्ड फाइनेंशियल सर्विसेज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड पर 10.40 लाख रुपये, मुथूट व्हीकल एंड एसेट फाइनेंस लिमिटेड पर 7.9 लाख रुपये और एसएमएफजी इंडिया क्रेडिट कंपनी लिमिटेड (पूर्व में फुलर्टन इंडिया क्रेडिट कंपनी लिमिटेड) 23.1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
हालांकि, रिजर्व बैंक ने कहा कि जुर्माना वैधानिक और नियामक अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य संस्थाओं द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर फैसला करना नहीं है।
विमानों की देरी से अगस्त में प्रभावित हुए 1.80 लाख यात्री
घरेलू विमानन कंपनियों की लेट लतीफी से यात्री परेशान हैं। अगस्त में विमानों की देरी के कारण 1.80 लाख यात्री प्रभावित हुए। इसके एवज में विमानन कंपनियों ने 2.44 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के मुताबिक, अगस्त में 38,599 फ्लाइट रद्द हुईं। इससे यात्रियों को मुआवजे और सुविधा के लिए कंपनियों को 1.14 करोड़ खर्च करने पड़े। 728 यात्रियों को यात्रा से रोक दिया गया। इस पर 77.96 लाख खर्च हुए। देश के विमानन उद्योग में सबसे अधिक 71 फीसदी विमान ही समय पर चल रहे हैं। अकासा के विमानों का समय पर प्रदर्शन 71.2 फीसदी, विस्तारा का 68.6 फीसदी रहा है। इंडिगो व एअर इंडिया का प्रदर्शन 66 फीसदी और स्पाइसजेट के सिर्फ 31 फीसदी विमान ही सही समय पर चले हैं। जनवरी से अगस्त तक कुल 10.55 करोड़ लोगों ने हवाई यात्रा की।