केंद्र ने बुधवार को कोयला ब्लॉकों के वाणिज्यिक खनन के लिए नीलामी का सातवां चरण शुरू कर दिया है। इसके तहत 106 खदानों को बिक्री पर रखा गया है। सातवें दौर में बिक्री पर रखे गए इन ब्लॉकों में से 61 का आंशिक रूप से अन्वेषण किया गया है और 45 खानों का पूरी तरह से अन्वेषण किया गया है। नीलामी के नवीनतम दौर में 95 गैर-कोकिंग कोयला खदानों, 10 लिग्नाइट खदानों और एक कोकिंग कोयला खदान की पेशकश की जा रही है।
नीलामी के इस दौर की शुरुआत करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कोयले को काला सोना माना जाता है जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों में हमारी ऊर्जा खपत बढ़ी है और यह बढ़ती रहेगी। इस जरूरत को पूरा करने के लिए हमें आज से ही प्रयास शुरू करने होंगे।
कोयला मंत्री बोले- खदानों से जल्दी उत्पादन शुरू करने वाली कंपनियों को मिलेगा प्रोत्साहन
इस मौके पर राजनाथ सिंह के साथ मौजूद केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार उन कंपनियों को प्रोत्साहन देगी जो खदानों से जल्द उत्पादन शुरू करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि कोयला अगले 40-50 वर्षों तक उपयोग में बना रहेगा।
कोयला मंत्रालय के अनुसार, खानों का विवरण, नीलामी की शर्तें और समय सीमा एमएसटीसी नीलामी प्लेटफॉर्म पर देखी जा सकती है। यह नीलामी राजस्व हिस्सेदारी के प्रतिशत के आधार पर दो चरणों की पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से ऑनलाइन आयोजित की जाएगी।
जोशी ने यह भी कहा कि छठी किस्त के दौरान नीलाम की गई 29 कोयला खानों के लिए समझौते पर हस्ताक्षर समारोह भी आज आयोजित किया गया। मंत्री ने कहा, "अब तक 6 किस्तों में, 87 ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी की गई है, जिसकी 220 मीट्रिक टन की पीआरसी (पीक रेटेड क्षमता) है। जेएसडब्ल्यू सीमेंट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट्स, अंबुजा सीमेंट्स और जिंदल पावर जैसी कंपनियां छठे दौर की नीलामी में सफल बोलीदाताओं में शामिल थीं।