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Tax: वित्त विधेयक में संशोधन का प्रस्ताव, करदाताओं को रियल एस्टेट संपत्ति पर पूंजीगत लाभ कर के आकलन का विकल्प

Tue, 06 Aug 2024 10:29 PM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, नई दिल्ली

सार

सरकार ने 2024-25 के बजट में अचल संपत्तियों पर मिलने वाले इंडेक्सेशन लाभ को हटा दिया था। इसकी भरपाई के लिए एलटीसीजी कर की दर को 20 फीसदी से घटाकर 12.5 फीसदी कर दिया था। इस फैसले पर करदाताओं की आलोचना झेलने के बाद सरकार ने अब संशोधन का प्रस्ताव रखा है।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : संसद टीवी
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विस्तार
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सरकार ने वित्त विधेयक में संशोधन का प्रस्ताव किया है। इसके तहत करदाताओं को 23 जुलाई, 2024 से पहले खरीदी गई रियल एस्टेट संपत्ति पर पूंजीगत लाभ कर के आकलन का विकल्प मिलेगा। इसके तहत करदाताओं को मुद्रास्फीति के प्रभाव को हटाए (इंडेक्सेशन) बिना 12.5 प्रतिशत या इंडेक्सेशन के साथ 20 प्रतिशत की दर से कर का आकलन कर जो कम कर हो उसके भुगतान की सुविधा मिलेगी।

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किन्हें मिलेगा संशोधन का लाभ?
वित्त विधेयक, 2024 में संशोधन के प्रस्ताव के तहत  23 जुलाई, 2024 से पहले अर्जित भूमि और भवन के हस्तांतरण पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) राहत दी जाएगी। यह केवल देश में रहने वाले लोगों और अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) पर लागू होगा। इसके तहत पुराने कानून (सूचीकरण के साथ) की तुलना में नए कानून के तहत किसी भी अतिरिक्त कर को नजरअंदाज कर दिया जाएगा।

किन करदाताओं को नहीं मिलेगा लाभ?
इस सुविधा का लाभ अनिवासियों, कंपनियों, साझेदारी फर्मों, एलएलपी और अन्य संस्थाओं को नहीं मिलेगा। इस संशोधन का उद्देश्य कुछ संपत्ति हस्तांतरणों से एलटीसीजी पर निवासी व्यक्तियों और एचयूएफ को कर राहत प्रदान करना है, जबकि अन्य करदाताओं के लिए नई कर संरचना को बनाए रखना है।
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मंगलवार को सरकार ने दिया संशोधन का प्रस्ताव
जानकारी के मुताबिक, सरकार ने मंगलवार को रियल एस्टेट संपत्तियों पर पूंजीगत लाभ कर के संबंध में करदाताओं को राहत देने का प्रस्ताव दिया, जिसमें उन्हें 20 प्रतिशत और 12.5 प्रतिशत कर दरों के बीच चयन करने का विकल्प दिया गया। वित्त विधेयक 2024 में संशोधन के अनुसार, 23 जुलाई 2024 से पहले मकान खरीदने वाला व्यक्ति या एचयूएफ, इंडेक्सेशन के बिना 12.5 प्रतिशत की नई योजना और इंडेक्सेशन के साथ 20 प्रतिशत की पुरानी योजना के तहत अपने करों की गणना कर सकता है और ऐसा कर चुका सकता है जो दोनों में से कम हो।

लोकसभा सदस्यों को बांटे गए संशोधन प्रस्ताव के मुताबिक, कोई व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) 23 जुलाई से पहले खरीदे गए अपने मकान को बेचने पर मिली राशि पर इंडेक्सेशन के बिना 12.5 फीसदी या इंडेक्सेशन लाभ के साथ 20 फीसदी की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) कर देनदारी की गणना कर सकता है। दोनों व्यवस्थाओं में से जिनमें भी कम कर देनदारी बन रही हो, करदाता अपने हिसाब से उसे चुन सकता है।

इससे पहले सरकार ने 2024-25 के बजट में अचल संपत्तियों पर मिलने वाले इंडेक्सेशन लाभ को हटा दिया था। इसकी भरपाई के लिए एलटीसीजी कर की दर को 20 फीसदी से घटाकर 12.5 फीसदी कर दिया था। इस फैसले पर करदाताओं की आलोचना झेलने के बाद सरकार ने अब संशोधन का प्रस्ताव रखा है।

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