सरकार ने आयकर के बाद अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में भी सबसे बड़ा सुधार करते हुए ‘जीएसटी 2.0’ लागू करने का साहसिक निर्णय लिया है। किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए यह आसान नहीं होता, क्योंकि टैक्स में राहत का सीधा असर राजकोष पर पड़ता है। लेकिन, सरकार ने लगातार दूसरी बार ऐसा कर संदेश दिया है कि जनता के हित उसके हर फैसले की धुरी हैं। यह दुर्लभ है कि कम समय में दो बड़े कर सुधार लागू किए जाएं। यही वह नीति है, जिसने मोदी सरकार को आम आदमी के बीच विश्वास का प्रतीक बना दिया है।
उपभोग और मांग में बढ़ोतरी
जीएसटी स्लैब घटने का असर सीधे उपभोग पर पड़ना तय है। वित्त विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मांग बढ़ेगी। छोटे व्यापारियों से लेकर बड़ी कंपनियों तक को फायदा मिलेगा। बाजारों में पहले ही रौनक लौटने लगी है और त्योहारी सीजन से पहले ग्राहकों में खरीदारी को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
युवाओं के लिए सशक्त अवसर
नया स्ट्रक्चर भारत के युवाओं के लिए एक सशक्त अवसर प्रस्तुत करता है। दरों को सरल बनाकर, अनुपालन प्रक्रिया को सहज बनाकर और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं पर छूट देकर, यह प्रणाली घरेलू खरीद क्षमता को बढ़ावा देती है। इससे युवाओं की जेब पर बचत के रूप में सीधा असर पड़ेगा।
स्टार्टअप-छोटे उद्यमों को भी लाभ
नई व्यवस्था से स्टार्टअप्स और छोटे उद्यमों को भी लाभ होगा, क्योंकि कम कर दरें एवं आसान नियम नवाचार को बढ़ावा देंगे। युवा उद्यमियों के लिए यह अनुकूल वातावरण प्रदान करता है, जिसमें वे अपने विचारों को व्यवसाय में बदल सकते हैं। बीमा जैसी सेवाओं पर छूट उन्हें स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा की ओर प्रोत्साहित करती है।
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निवेश और उद्योग जगत को बल
जीएसटी 2.0 उद्योग जगत के लिए भी राहत पैकेज है। छोटे व मझोले उद्यमों को जटिल कर दरों और कैटेगरी क्लासिफिकेशन के बोझ से मुक्ति मिलेगी। इनपुट टैक्स क्रेडिट सरल होगा। अब कंपनियों को इनवॉइस मिलान की जटिलता से नहीं जूझना पड़ेगा, जिससे कारोबारी माहौल आसान होगा। इसमें कोई शक नहीं है कि भारत का टैक्स ढांचा अब दुनिया के लिए एक मॉडल बन सकता है। यह सुधार सिर्फ टैक्स कलेक्शन ही नहीं, बल्कि निवेश और रोजगार सृजन का नया द्वार खोलेगा।