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जीडीपी मामलाः अरविंद सुब्रमण्यम के तर्क को सरकार ने किया खारिज

Wed, 12 Jun 2019 04:59 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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पूर्व मुख्य वित्तीय सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम
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देश के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकर अरविंद सुब्रमण्यम द्वारा जीडीपी के आंकड़ों पर सवाल उठाने को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने सिरे से खारिज कर दिया। सरकार ने कहा है कि जीडीपी पर अरविंद तभी सवाल उठाते, जब वो आर्थिक सलाहकार थे। 

बिंदुवार दिया जाएगा जवाब

केंद्र सरकार ने कहा है परिषद जल्द ही बिंदुवार इसका जवाब देगी। फिलहाल काउंसिल अभी उनके सभी बिंदुओं पर गौर कर रही है। 

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संशय में हैं सुब्रमण्यम

परिषद ने एक बयान में कहा कि वह सुब्रमण्यम के आकलन को विस्तार से देखेगी और बिंदुवार उत्तर लेकर सामने आएगी। परिषद ने कहा, ‘अभी के समय में उचित अकादमिक बहस के मुद्दे को सनसनी बनाने की किसी कोशिश में उलझना भारतीय सांख्यिकी प्रणाली की गुणवत्ता और स्वतंत्रता को बचाये रखने के लिये उचित नहीं है। इन सब से पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार भी अच्छे से परिचित हैं।'

उसने कहा, ‘निश्चित तौर पर डॉ सुब्रमण्यम ने इन मुद्दों को तब भी उठाया होगा जब वह मुख्य आर्थिक सलाहकार के पद पर काम रहे थे। हालांकि उन्होंने खुद माना कि उन्होंने समझने के लिये समय लिया और अब भी वह संशय में हैं।’

शोध पत्र में उठाया था सवाल

सुब्रमण्यम के अनुसार जो आंकड़े पेश किए गए, वह झूठे थे। पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार सुब्रमण्यम ने अपने ट्विटर एकाउंट पर शोध पत्र में प्रस्तुत किए गए सबूत भी दिए हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इस रिसर्च पेपर में अरविंद सुब्रमण्यम का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2011-12 और 2016-17 के दौरान देश की आर्थिक विकास दर को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।

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वित्तीय वर्ष 2011-12 और 2016-17 के दौरान विकास दर का आधिकारिक आंकड़ा सात फीसदी के करीब था, जबकि सुब्रमण्यम के अनुसार, असल जीडीपी करीब 4.5 फीसदी ही थी। इन वित्तीय वर्षों में विकास दर करीब 2.5 फीसदी बढ़ाकर दिखाई गई।  

'मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर' गलत आंकड़ों का बड़ा कारण

सुब्रमण्यम के अनुसार, जीडीपी के गलत मापन का सबसे बड़ा कारण मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर(निर्माण क्षेत्र) रहा। सुब्रमण्यम ने कहा कि साल 2011 से पहले मैन्यूफैक्चरिंग उत्पादन, मैन्यूफैक्चरिंग उत्पाद और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक और मैन्यूफैक्चरिंग निर्यात से संबंधित होता था, लेकिन बाद के सालों में इस संबंध में काफी गिरावट आई है। 

सुब्रमण्यम की रिसर्च पेपर के अनुसार, जीडीपी ग्रोथ के लिए 17 अहम आर्थिक बिंदु होते हैं, लेकिन एमसीए-21 डाटाबेस में इन बिंदुओं को शामिल ही नहीं किया गया। मालूम हो कि देश की जीडीपी की गणना में एमसीए-21 डाटाबेस का अहम रोल होता है।

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