घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम भले ही आसमान छू रहे हों, लेकिन केंद्र सरकार अब भी इन पर प्रति लीटर क्रमश: करीब 20 रुपये और 15 रुपये कर वसूल रही है। केंद्र सरकार नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच पेट्रोल-डीजल पर नौ बार केंद्रीय उत्पाद शुल्क बढ़ा चुकी है।
मोदी सरकार ने जब केंद्र में सत्ता संभाली, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट का रुख था, लेकिन सरकार ने कीमत घटाने के बजाय उत्पाद शुल्क नौ बार बढ़ा दिया। इस तरह डीजल पर प्रति लीटर 13.57 रुपये, जबकि पेट्रोल पर 11.77 रुपये का बोझ बढ़ गया। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद जब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने लगे, तो अक्तूबर 2017 में दोनों ईंधनों पर प्रति लीटर दो रुपये का उत्पाद शुल्क घटा दिया गया।
मौजूदा केंद्रीय कर (रुपये प्रति लीटर)
कर पेट्रोल डीजल
बेसिक एक्साइज ड्यूटी 4.48 6.33
एडिशनल एक्साइज ड्यूटी 7.00 1.00
रोड एंड इंफ्रा सेस 8.00 8.00
स्रोत- पीपीएसी, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
राज्य नहीं घटा रहे वैट
कुछ महीने पहले जब पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर हो-हल्ला हुआ था, तो वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कर पेट्रोल-डीजल पर वैट घटाने की गुजारिश की थी। जेटली का कहना था कि उच्च वैट दर के कारण उद्यमियों की लागत बढ़ती है। इनके जीएसटी में शामिल नहीं होने के कारण उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ भी नहीं मिलता है। महाराष्ट्र में पेट्रोल पर सबसे ज्यादा 39.78 फीसदी और आंध्र प्रदेश में डीजल पर सबसे ज्यादा 28.47 फीसदी वैट वसूला जा रहा है।
जीएसटी में शामिल हो पेट्रोल-डीजल : प्रधान
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि जीएसटी में पेट्रोल और डीजल को भी जल्द शामिल किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ एक आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। यह जैसे ही हो जाएगी, पेट्रोल डीजल भी जीएसटी के दायरे में आ जाएंगे।