दिल्ली में 29 अक्तूबर को सोना 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रहा, जबकि चांदी 500 रुपये बढ़कर 1,98,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर दबाव दिखा।
दिल्ली में करवा चौथ के दिन गुरुवार को सोने का भाव 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रहा। ऊंची दरों के कारण आभूषण विक्रेता और खुदरा विक्रेता नई खरीद को लेकर सतर्क रहे। हालांकि, चांदी की कीमतों में 500 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई।
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अखिल भारतीय सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, चांदी अब 1,98,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है, जिसमें सभी कर शामिल हैं। बुधवार को सफेद धातु 1.98 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर अपरिवर्तित बंद हुई थी।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मिश्रित संकेतों के बीच घरेलू सोने के भाव स्थिर रहे। उन्होंने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिले समर्थन को कम कर दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हाजिर सोना 49.38 डॉलर या 1.21 फीसदी गिरकर 4,018.08 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, चांदी भी 3 फीसदी गिरकर 52.41 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
सोने पर क्यों दिखा दबाव?
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स लिमिटेड की कमोडिटीज और करेंसी की शोध विश्लेषक वेदिका नार्वेकर ने बताया कि फेडरल रिजर्व के सख्त दृष्टिकोण से सोने पर दबाव बना रहा। गुरुवार को सोना लगभग 4,024 डॉलर प्रति औंस के आसपास रहा। लगातार ऊर्जा-संचालित महंगाई भी एक प्रमुख कारण है। इससे आगे मौद्रिक नीति में सख्ती की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।
बाजार में अस्थिरता के अन्य कारण क्या हैं?
नार्वेकर ने कहा कि कच्चे तेल की मजबूत कीमतें बाजार में अस्थिरता बढ़ा रही हैं। फेड की नीतिगत राह को लेकर अनिश्चितता भी एक कारण है। इक्विटी बाजार में बिकवाली भी अस्थिरता में योगदान दे रही है। हालांकि, भू-राजनीतिक जोखिम और केंद्रीय बैंकों की खरीद से सोने को समर्थन मिल सकता है।