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गोल्ड हॉलमार्किंग: क्या बढ़ेगी कीमत या बेकार होगा घर पर पड़ा सोना? यहां मिलेगा हर सवाल का जवाब

Wed, 16 Jun 2021 09:55 AM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ज्वैलर्स अब से सिर्फ 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट के सोने के आभूषण ही बेच सकते हैं। ऐसे में लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उनके घर में पड़े सोने का क्या होगा। 
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आज से गोल्ड हॉलमार्किंग अनिवार्य - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कई बार डेडलाइन बढ़ने के बाद आखिरकार देशभर में गोल्ड हॉलमार्किंग का नियम लागू हो ही गया। देशभर में ग्राहकों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार ने इस नियम को लागू किया है। सोना खरीदना हर किसी का सपना होता है। लोग कड़ी मेहनत कर सोना खरीदने के लिए पैसे जमा करते हैं। लेकिन ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब ज्वैलर्स ने सोने के नाम पर उपभोक्ताओं को ठगा हो। ज्वैलर्स अपने ग्राहकों को ज्यादा शुद्धता वाले सोने के दाम पर कम शुद्धता वाले सोने के गहने बेच देते हैं। लेकिन आज से गोल्ड हॉलमार्किंग का नियम पूरे देश में लागू हो गया है। इससे ज्वैलर्स का उपभोक्ताओं को ठगने का रास्ता बंद हो जाएगा।

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हॉलमार्किंग यानी शुद्धता की गारंटी
हॉलमार्क एक तरह की गारंटी है। इसके तहत हर गोल्ड ज्वैलरी पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) अपने मार्क के द्वारा शुद्धता की गारंटी देता है। यदि आसान भाषा में कहें तो यह विश्वसनीयता प्रदान करने का एक माध्यम है। यदि गहनों पर हॉलमार्क है तो इसका मतलब है कि उसकी शुद्धता प्रमाणित है। बीआईएस का चिह्न प्रमाणित करता है कि गहना भारतीय मानक ब्यूरो के स्टैंडर्ड पर खरा उतरता है। 

ग्राहकों को कितने कैरेट वाला सोना मिलेगा?
ज्वैलर्स अब सिर्फ 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट के सोने के आभूषण बेच सकते हैं। बीआईएस अप्रैल 2000 से गोल्ड हॉलमार्किंग की स्कीम चला रही है। मौजूदा समय में सिर्फ 40 फीसदी ज्वैलरी की ही हॉलमार्किंग हुई है। ज्वैलर्स की सुविधा के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को ऑनलाइन और ऑटोमैटिक कर दिया गया है। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) के मुताबिक भारत में करीब चार लाख ज्वैलर्स हैं, जिनमें से 35,879 बीआईएस सर्टिफाइड हैं।

  • 14 कैरेट वाले सोने में 58.50 फीसदी सोना होता है।
  • 18 कैरेट वाले सोने में 75 फीसदी सोना होता है।
  • 22 कैरेट वाले सोने में 91.60 फीसदी सोना होता है।

24 कैरेट सोने को सबसे शुद्ध सोना माना जाता है। लेकिन इसके आभूषण नहीं बनते। ऐसा इसलिए क्योंकि वो बहुत मुलायम हो जाता है। ज्यादातर आभूषणों के लिए 22 कैरेट सोने का ही इस्तेमाल होता है।

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उदाहरण-
एक कैरेट सोने का अर्थ होता है 1/24 गोल्ड। यदि आपको 18 कैरेट का सोना खरीदना है, तो 18 को 24 से भाग कर उसे 100 से गुणा करें। (18/24)x100= 75 
यानी आपके आभूषण में इस्तेमाल सोने की शुद्धता 75 फीसदी है।

सोने की ज्वैलरी पर कैसे करें इसकी पहचान? 
हर कैरेट के सोने के लिए हॉलमार्क नंबर अंकित किए जाते हैं। ज्वैलर्स की ओर से 22 कैरेट के लिए 916 नंबर का इस्तेमाल किया जाता है। 18 कैरेट के लिए 750 नंबर का इस्तेमाल करते हैं और 14 कैरेट के लिए 585 नंबर का उपयोग किया जाता है। इन अंकों के जरिए आपको पता चल जाएगा कि सोना कितने कैरेट का है।

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क्या बेकार हो जाएगा घर पर पड़ा सोना? 
अब लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उनके घर में पड़े सोने का क्या होगा। सालों पहले खरीदा हुआ सोना हॉलमार्क न होने पर क्या बरबाद हो जाएगा? मालूम हो कि सोने की हॉलमार्किंग का घर में रखे सोने पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आप पहले की ही तरह अपने घर में सोना आसानी से रख सकते हैं। हॉलमार्किंग का नियम सुनार के लिए है।

नए नियम का सोने की कीमत पर क्या पड़ेगा असर?
देश में सोना पहले ही बेहद महंगा है। अब आम जनता के मन में यह सवाल है कि गोल्ड हॉलमार्किंग का नियम लागू होने से  क्या इसकी कीमत और बढ़ जाएगी? यह बेहद अहम है क्योंकि जो लोग सालों से सोना खरीदने के लिए पैसे जमा कर रहे थे, उन्हें अब और समय लग सकता है। इस संदर्भ में विशेषज्ञ कहते हैं कि कारोबारी सोने के गहने की हॉलमार्किंग की लागत ग्राहकों से वसूल सकते हैं। 

कितना आता है हॉलमार्किंग का खर्च?
मालूम हो कि गहने की हॉलमार्किंग की लागत 35 रुपये है। ऐसे में ग्राहक जितने आइटम खरीदेंगे, उन्हें अतिरिक्त रकम चुकानी पड़ सकती है। इसके अतिरिक्त इस पर टैक्स भी लगता है। इसलिए माना रहा है कि ग्राहकों को एक आइटम खरीदने पर 35 रुपये और चुकाने पड़ सकते हैं। बीआईएस लैब में गहनों की शुद्धता जांचने के लिए या हॉलमार्क के लिए छह से आठ घंटों तक का समय लगता है। ज्वैलरी पर बीआईएस का निशान, हॉलमार्किंग केंद्र का लोगो, सोने की शुद्धता लिखी होगी। साथ ही ज्वैलरी कब बनाई गई, इसका साल और ज्वैलर का लोगो भी उस पर रहेगा।

नियम का उल्लंघन करने पर क्या होगी कार्रवाई?
नए कानून के तहत जुर्माने की राशि और जेल दोनों का प्रावधान है। अगर कोई भी ज्वैलर बिना हॉलमार्किंग के गोल्ड ज्वैलरी बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एक साल की जेल के अतिरिक्त उस पर गोल्ड ज्वैलरी की वैल्यू की पांच गुना तक पेनल्टी भी लगाई जा सकती है। 
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