वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की वैश्विक धनशोधन रोधी निगरानी संस्था ने भारत से स्थानीय नेताओं, सरकारी अधिकारियों और उनके परिवारों के बैंक खातों की जांच पड़ताल प्रक्रिया में सुधार करने को कहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सरकार से जुड़े दो सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
राजनीतिक रसूख वाले व्यक्तियों (PEPs) की वित्तीय स्थिति की कड़ी जांच की सिफारिश वर्ष 2023 में शुरू हुई भारत की धन-शोधन रोधी प्रणालियों की एफएटीएफ की समीक्षा का हिस्सा है। एफएटीएफ जल्द ही इस संबंध में अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रकाशित करने वाला है।
वैश्विक नियमों के तहत, राजनेता, उनके परिवार और करीबी सहयोगियों की ओर से रिश्वत और भ्रष्टाचार के मामलों में संलित्प रहने की आशंका के कारण उनके बैंक खातों की जांच जरूरी है।
सरकार के साथ साझा की गई एफएटीएफ की एक रिपोर्ट में घरेलू पीईपी के खातों में धन के स्रोत की अधिक कठोर निगरानी की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे लोगों या उनके परिवारों के लिए किसी भी नए खातों को मंजूरी बैंक के शीर्ष प्रबंधकों की ओर से दी जानी चाहिए।
भारत में पहले से ही वैश्विक राजनीतिक हस्तियों के मामले में सख्त बैंकिंग जांच प्रक्रिया लागू है।
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा, "कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें हमें सुधार करने की जरूरत है।" पिछले दिसंबर में, आम चुनावों से पहले, सरकार ने संसद को बताया था कि वह घरेलू राजनीतिक शख्सियतों को सख्त बैंकिंग जांच के दायरे में लाने का इरादा नहीं रखती है। उस दौरान सरकार ने यह भी कहा था कि वह कोई भी बदलाव करने से पहले एफएटीएफ की रिपोर्ट का इंतजार करेगी।
एफएटीएफ ने जून में कहा था कि भारत धनशोधन रोधी कानूनों को लागू करने के मामले में उच्च स्तर की जांच प्रक्रिया का पालन करने लगा है एक सूत्र ने कहा कि सरकार के पास अगली समीक्षा से पहले अनुशंसित बैंकिंग नियमों को लागू करने के लिए पांच साल का समय है।
सूत्रों के अनुसार एफएटीएफ ने भारत को धनशोधन रोधी कानूनों को लागू करने से जुड़े 40 मानकों में से 37 पर "अनुपालन" और "बड़े पैमाने पर अनुपालन" करने वाला बताया है।
जिन तीन क्षेत्रों में आंशिक अनुपालन की बात कही गई है उनमें घरेलू राजनीतिक हस्तियों की बैंक जांच और गैर-लाभकारी संगठनों, गैर-वित्तीय व्यवसायों व पेशेवरों की वित्तीय निगरानी शामिल है।
जून में, भारत सरकार की ओर से एफएटीएफ के मूल्यांकन को उत्कृष्ट बताया गया था। लेकिन इस संबंध में किसी भी बारीकियों का खुलासा नहीं किया था।
सिंगापुर में एफएटीएफ की जून की बैठक में एक अंतरिम रिपोर्ट पर चर्चा की गई थी। जिसमें सिफारिश की गई है कि भारत धनशोधन और आतंकवादी वित्तपोषण से जुड़े मामलों के अभियोजन में तेजी लाए। हालांकि यह भी सुनिश्चित करने पर बल दिया गया कि गैर-लाभकारी संगठनों को गलत तरीके से निशाना नहीं बनाया जाए।