वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि वैश्विक व्यापार युद्ध से भले ही शुरू में अस्थिरता नजर आए लेकिन धीरे-धीरे इससे भारत को कई नई संभावनाएं मिलेंगी। इससे भारत आगे चलकर बड़ा कारोबारी और उत्पादन केंद्र बन सकता है। वित्त मंत्री ने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के वार्षिक कार्यक्रम को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए यह बातें कही।
जेटली ने कारोबारियों से नैतिक तरीकों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि कंपनियों को अपने बकाया करों का भुगतान करना चाहिए क्योंकि दीवालिया कानून (आईबीसी) के लागू होने से रातों रात देश से भागने के रास्ते बंद हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ वैश्विक कारोबारी गतिविधियों का भारत पर नकारात्मक असर पड़ा है लेकिन भविष्य में तेज विकास के लिए देश को नए मौके भी मिलेंगे।
व्यापार युद्ध से खुले कई बाजार
जेटली ने कहा कि व्यापार युद्ध से शुरुआत में अस्थिरता पैदा हुई लेकिन इससे कई नए बाजार सामने आए हैं। इससे भारत में एक बड़ा कारोबारी और उत्पादन केंद्र बनने के रास्ते खुलेंगे। इसलिए हमें हालात को बहुत नजदीक से देखना होता है। पता नहीं कि चुनौती कब मौका बन जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच चल रही मौजूदा युद्ध से भारत में बनने वाली मशीनों, इलेक्ट्रिक उपकरणों, वाहनों एवं कलपुर्जों, रसायन, प्लास्टिक एवं रबर उत्पादों को अमेरिकी बाजार में नई पहचान मिल सकती है।
महंगा कच्चा तेल बहुत बड़ी चुनौती
जेटली ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को भी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बताया क्योंकि कच्चे तेल के लिए भारत लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है और अपनी जरूरत का लगभग 81 फीसदी आयात करता है। भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतें बढ़ने से घरेलू स्तर पर ईंधन भी महंगा हुआ है। गौरतलब है कि पिछले पांच सप्ताह में ब्रेंट क्रूड का दाम 71 डॉलर से बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।