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आय का जरिया: रिटायरमेंट के बाद भी हर महीने पाएं तय रकम, छात्रों के लिए भी फायदेमंद है SWP प्लान

Mon, 26 May 2025 07:37 AM IST
शुभम कुमार बलवंत जैन, टैक्स एवं निवेश सलाहकार

सार

लगातार बढ़ते महंगाई के दौर में सेवानिवृत्ति के बाद रोजमर्रा के खर्चे चलाने और बेहतर जीवनयापन करने के लिए आपके पास अच्छा-खासा फंड जमा होना चाहिए। अगर आपने पर्याप्त फंड जमा कर लिया है, तो सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान आपके पूरे जीवनकाल तक खर्चों को पूरा करने में काफी मददगार साबित होगा।
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रुपया (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सेवानिवृत्ति के बाद जब नियमित आय बंद हो जाती है, तो सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (एसडब्ल्यूपी) उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी साबित होता है, जिन्हें अपने दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए हर महीने एक निश्चित राशि की आवश्यकता होती है। एसडब्ल्यूपी सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) का ठीक उल्टा है। एसआईपी में आप नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि निवेश करते हैं, जबकि एसडब्ल्यूपी में आप अपने मौजूदा म्यूचुअल फंड निवेश से नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि निकालते हैं। सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान एन्युटी या फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से कई मायनों में भी काफी बेहतर होता है।
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छात्रों के लिए भी उपयोगी है विकल्प
सेवानिवृत्ति के बाद यानी बुढ़ापे में व्यक्ति को अपने मासिक खर्चों को पूरा करने के लिए हर महीने पैसे की जरूरत होती है। जिनके पास किराये की संपत्ति से आय जैसे अन्य स्रोत हैं, वे भी अपने मौजूदा म्यूचुअल फंड निवेश से एसडब्ल्यूपी के माध्यम से इसे पूरक बना सकते हैं। यह उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है, जिन्हें नियमित समय अंतराल पर एक निश्चित राशि की आवश्यकता होती है। छात्रों के लिए भी यह विकल्प बहुत उपयोगी है, जिन्हें हर महीने एक निश्चित राशि की जरूरत होती है।

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हर माह निकाल सकते हैं इतने पैसे
एसडब्ल्यूपी के जरिये हर महीने निकाली जाने वाली राशि मुख्य रूप से आपके घरेलू खर्चों को पूरा करने की मासिक आवश्यकता पर निर्भर करती है। यह भी ध्यान रखना होगा कि सेवानिवृति्त फंड आपके जीवनकाल तक बना रहे।
  •  एक सामान्य नियम के अनुसार, आपको हर साल अपने सेवानिवृत्ति कॉर्पस का 40 फीसदी से अधिक नहीं निकालना चाहिए।  
  •  उदाहरण के लिए, अगर आपने सेवानिवृत्ति के लिए 1.50 करोड़ रुपये का फंड जमा किया है, तो आपको पहले वर्ष के दौरान 4 फीसदी से अधिक (6 लाख रुपये) नहीं निकालना चाहिए।
  •  हर साल निकाली जाने वाली राशि आपके कॉर्पस के उस समय के मूल्य के आधार पर बढ़ेगी।

कितना फंड जमा करना पर्याप्त
यह सुनिश्चित करने के लिए कि एसडबल्यूपी सेवानिवृत्ति के बाद साथ दे, आपको अपनी कमाई के वर्षों के दौरान पर्याप्त फंड जमा करना होगा। एक सामान्य नियम के अनुसार, अगर आप 60 वर्ष में सेवानिवृत्ति होते हैं, तो आपको इस समय तक अपने सालाना खर्चों का 25 गुना जमा करना होगा। उदाहरण के लिए, अगर सेवानिवृत्ति के समय आपका मासिक खर्च 50,000 रुपये है, जो सालाना 6 लाख रुपये बनता है, तो आपको 60 वर्ष की आयु तक 1.50 करोड़ जमा करना होगा।

एन्युटी या एफडी से इसलिए है बेहतर
जब आप सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान चुनते हैं, तो म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश की कुछ यूनिट्स एसडब्ल्यूपी की राशि की आवश्यकता को पूरा करने के लिए रिडीम की जाती हैं। यूनिट्स को रिडेम्पशन की तारीख पर नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) के आधार पर रिडीम किया जाता है। इसमें आपके निवेश की लागत और निवेश मूल्य में वृद्धि शामिल होती है। खरीद और रिडेम्पशन की एनएवी के बीच का अंतर ही आपकी आय मानी जाती है और उस पर टैक्स लगता है। टैक्स देनदारी इस बात पर निर्भर करती है कि निवेश डेट स्कीम में किया गया है या इक्विटी स्कीम में।  

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31 मार्च 2023 के बाद किए गए डेट स्कीम में निवेश के लिए खरीद लागत और रिडेम्पशन मूल्य के बीच का अंतर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन माना जाता है और इस पर स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता है, भले ही आपका होल्डिंग पीरियड कितना भी हो।
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एक अप्रैल, 2023 से पहले किए गए डेट स्कीम में निवेश पर होने वाले मुनाफे पर 12.50 फीसदी की फ्लैट दर से टैक्स देना होता है। इक्विटी फंड स्कीम को 12 महीने के भीतर रिडीम किए गए मुनाफे पर 20 फीसदी और 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए निवेश पर 12.50 फीसदी टैक्स लगता है।  इसके विपरीत, एन्युटी से प्राप्त पूरी पेंशन और एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर आपको स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स देना होता है।

टैक्स के मोर्चे पर भी है फायदेमंद
एसडब्ल्यूपी में रिडेम्पशन आय के सिर्फ एक हिस्से पर टैक्स लगता है, वह भी इक्विटी स्कीम में रियायती दर पर, जबकि पेंशन-एफडी से प्राप्त राशि पर स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता है। इसलिए, एसडब्ल्पूयी सेवानिवृति्त फंड से मासिक जरूरतें पूरी करने का टैक्स-कुशल तरीका प्रदान करता है।
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