घरेलू उद्यान बेहतर खाद्य सुरक्षा, पुरुषों और महिलाओं की उच्च आहार गुणवत्ता में योगदान करते हैं। ओडिशा की जंगली पहाड़ियां में जहां देश के कुछ सबसे कमजोर आदिवासी समूहों के घर हैं वहां किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि छोटे घर के बगीचे बाजरा, दालें, ताजे फल और सब्जियां पैदा करके खाद्य असुरक्षा, कुपोषण और गरीबी के खिलाफ मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार 2020 में दुनिया भर में 82.8 करोड़ लोग भूख से जूझ रहे थे और लगभग 3.1 अरब लोगों को स्वस्थ आहार नहीं मिला। इस बीच घर के बगीचे को लेकर किए गए शोध ने राज्य में आदिवासी समुदायों के लगभग 1,900 परिवारों पर अध्ययन किया गया।
शोध से इस बात के ठोस सबूत सामने आए कि घरेलू उद्यान इन ग्रामीण कृषक समुदायों में खाद्य सुरक्षा, आहार की गुणवत्ता और आय में सुधार कर रहे हैं। एलायंस ऑफ बायोवर्सिटी इंटरनेशनल के शोधकर्ताओं का कहना है कि घर में बगीचा होने से वार्षिक घरेलू उत्पादन में लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।
37 फीसदी तक बढ़ गई मासिक आय
शोध के मुताबिक घर में बगीचा एक संसाधन के रूप में गरीब किसानों और कमजोर जनसंख्या समूहों के लिए गरीबी कम करने के साथ पोषित आहार प्राप्त करने के लिए एक अच्छा माध्यम है । इससे घरेलू उद्यानों को अपनाने वालों के बीच खाद्य सुरक्षा के बढ़ने की संभावना अधिक होती है। घर में बगीचा होने से प्रति व्यक्ति मासिक आय में 37 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई और गरीबी के प्रसार में 11.7 प्रतिशत की कमी आई।