फ्यूचर रिटेल लिमिटेड फिलहाल कॉर्पोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) से गुजर रही है। फ्यूचर रिटेल लिमिटेड के ऋणदाताओं ने स्पेस मंत्रा द्वारा प्रस्तुत बोली को खारिज कर दिया। स्पेस मंत्रा लेनदार समिति (सीओसी) की ई-वोटिंग प्रक्रिया में बहुमत हासिल करने में असफल रही। इस साल जुलाई में प्रस्ताव सीओसी के समक्ष पेश किया गया था।
एनसीएलटी ने स्पेस मंत्रा के अनुरोध को स्वीकार किया
फ्यूचर रिटेल लिमिटेड एफआरएल ने सोमवार को कहा कि स्पेस मंत्रा द्वारा प्रस्तुत समाधान योजना को सीओसी ने पास नहीं किया है। अब दिवाला और दिवालियापन संहिता 2016 के तहत कार्रवाई की जाएगी। स्पेस मंत्रा ने करीब 550 करोड़ रुपये की पेशकश की थी, जो लिक्विडेशन वैल्यू के काफी करीब था। एफआरएल ने बताया कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने स्पेस मंत्रा के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है और सीआईआरपी को पूरा करने की समय सीमा 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया।
पूर्व प्रमोटर ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
जानकारी के अनुसार, दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) 330 दिनों के भीतर सीआईआरपी को पूरा करने का आदेश देती है। इसमें मुकदमेबाजी का समय भी शामिल है। फ्यूचर रिटेल के पूर्व प्रमोटर किशोर बियानी ने कंपनी की फोरेंसिक ऑडिट प्रक्रिया के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।