फिच रेटिंग्स ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान घटा दिया है। फिच रेटिंग्स ने इस साल जीडीपी के 6.6 फीसदी रहने की संभावना जताई है। हालांकि अगले साल विकास दर 7.1 फीसदी होने की संभावना है। फिच रेटिंग्स का कहना है कि ज्यादा कर्ज की वजह से वित्तीय नीतियों को और आसान बनाना सरकार के लिए मुश्किल होगा।
फिच कहा कि जीडीपी में तात्कालिक सुधार की गुंजाइश कम है। ऐसा इसलिए क्योंकि घरेलू मांग की स्थिति खराब है और निजी मांग और निवेश दोनों ही कमजोर हैं। इतना ही नहीं, वैश्विक व्यापार का माहौल पहले से ही कमजोर है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने लगातार चार बार फरवरी से 110 बेसिस प्वाइंट रेट कट किया है। सरकार का कर्ज और बढ़ने की स्थिति में मुद्रास्फीति और चालू खाते का घाटा और बढ़ जाएगा। इसलिए उम्मीद है कि सरकार वित्तीय नीतियों में और ढील देगी।