देश के मौजूदा आर्थिक संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार नए करेंसी नोट छापने की योजना नहीं बना रही। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यह जानकारी सोमवार को संसद में दी। कोरोना महामारी की वजह से आर्थिक संकट में कुछ अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने सरकार को सुझाव दिया था कि अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए ज्यादा करेंसी नोट छापे जा सकते हैं।
सीतारमण ने बताया कि साल 2020-21 में महामारी की वजह से भारत की वास्तविक जीडीपी में 7.3 प्रतिशत की अभूतपूर्व गिरावट हुई। यह गिरावट महामारी को नियंत्रित करने के लिए उठाए कदमों की वजह से आई। उन्होंने साफ किया, देश की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और यह धीरे-धीरे लॉकडाउन के पूर्व के स्तर पर पहुंच रही है। बीते वित्तवर्ष के दूसरे भाग में आत्मनिर्भर भारत मिशन का सहारा मिलने के बाद अर्थव्यवस्था तेजी से सुधार के पथ पर है। इस मिशन के तहत 29.87 लाख करोड़ का विशेष आर्थिक पैकेज दिया गया है। मौजूदा वित्तवर्ष के बजट में आर्थिक विकास के लिए पूंजीगत खर्च 34.5 प्रतिशत बढ़ाया गया है।
दूसरी लहर का अर्थव्यवस्था पर असर कम
एक अन्य सवाल के जवाब में सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर का अर्थव्यवस्था पर कम असर हुआ है। इसके लिए क्षेत्रीय स्तर पर लॉकडाउन जैसे कदम उठाए गए और टीकाकरण अभियान तेजी से चलाए गए। मार्च 2022 में खत्म हो रहे मौजूदा वित्त वर्ष के लिए बजट अनुमान हैं कि नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 14.4 प्रतिशत रह सकती है। दूसरी और आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के अनुसार भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 9.5 फीसदी रहने का अनुमान है।
पहले यह 10.5 फीसदी रहने का अनुमान था। यह गिरावट दूसरी लहर की वजह से हुई। वित्तमंत्री ने एक अन्य सवाल के जवाब में बताया कि आरबीआई ने 10,000 करोड़ रुपये के 3 वर्ष के विशेष दीर्घ अवधि रेपो ऑपरेशन की घोषणा की है। यह छोटे वित्तीय बैंकों के लिए हैं। इसके जरिए ऋण लेने वालों को करीब 10,00,000 रुपये के नए ऋण दिए जा सकेंगे। इनसे छोटे व मझोले उद्योगों को सहारा मिलेगा। असंगठित क्षेत्र की इकाइयों को भी महामारी के नुकसान से निपटने में मदद मिलेगी।
अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने दिया ये सुझाव
हालांकि कई अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने सरकार को सुझाव दिया है कि महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए और अधिक मुद्रा नोटों को छापा जाना चाहिए।
वित्त वर्ष 2022 में 10.5 फीसदी रह सकती है वृद्धि दर- आरबीआई
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि, 'मुझे विकास के अनुमान को नीचे की ओर संशोधित करने का कोई कारण नहीं दिखता है। पिछले वित्त वर्ष की शुरुआत जहां भारी गिरावट के साथ हुई थी, वहीं चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था वृद्धि की राह पर लौटी और जनवरी-मार्च 2021 तिमाही में 1.6 फीसदी वृद्धि हासिल की गई।
टीकाकरण की गति से तय होगा पुनरुद्धार का रास्ता
पिछले महीने भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों के एक लेख में कहा गया था कि कोविड-19 टीकाकरण की गति और पैमाना आर्थिक पुनरुद्धार के रास्ते को तय करेगा। इसमें यह भी कहा गया था कि अर्थव्यवस्था में महामारी तथा पहले से मौजूद चक्रीय और संरचनात्मक बाधाओं से पार पाने की जरूरी क्षमता तथा मजबूती है। एशियाई विकास बैंक ने कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के कारण चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटाकर 10 फीसदी किया।