करदाताओं के बेहतर सुविधाएं देने के आए सरकार आए दिन कोई न कोई एलान करती रहती है। अब वित्त मंत्रालय ने मौजूदा टैक्स स्लैब के रिव्यू के लिए और माल एवं सेवा कर (GST) से छूट वाली वस्तुओं की समीक्षा करने के लिए, कर चोरी के स्रोतों की पहचान के लिए और आयकर प्रणालियों में बदलाव के सुझाव लिए राज्यों के वित्त मंत्रियों की दो समितियों का गठन किया है।
इसके साथ ही दर युक्तिकरण संबंधी मंत्रियों का समूह (GoM) इन्वर्टेड शुल्क संरचना की भी समीक्षा करेगा और साथ ही कर की दरों के स्लैब के विलय सहित युक्तिकरण उपायों की सिफारिश करेगा।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री होंगे अध्यक्ष
सात सदस्यी पैनल दो महीने में रिपोर्ट सैंपेगा। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई इसके अध्यक्ष होंगे। इसमें पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा, केरल के वित्त मंत्री के एन बालगोपाल और बिहार के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद भी शामिल होंगे। यह समिति जीएसटी से मुक्त उत्पादों की आपूर्ति की भी समीक्षा करेगी। इसका उद्देश्य आईटीसी श्रृंखला के टूटने को खत्म करना और कर आधार का विस्तार करना है।
जीएसटी रिफॉर्म्स पर मंत्रियों का समूह (GoM) कर चोरी के स्रोतों का पता लगाएगा और साथ ही राजस्व में कमी को रोकने के लिए बिजनेस प्रोसेस तथा आईटी प्रणालियों में बदलाव का सुझाव देगा।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री होंगे आठ सदस्यी पैनल के अध्यक्ष
आठ सदस्यी पैनल के अध्यक्ष महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार होंगे। इसमें दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, तमिलनाडु के वित्त मंत्री पी टी राजन और छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री टी एस सिंह देव भी शामिल होंगे।
यह पैनल करदाताओं के पास उपलब्ध आयकर साधनों और इंटरफेस की समीक्षा करेगा। इसे और कारगर बनाने के तरीके सुझाएगा, बेहतर कर अनुपालन के लिए डाटा विश्लेषण के संभावित इस्तेमाल की पहचान करेगा। इतना ही नहीं, यह पैनल केंद्रीय एवं राज्य के कर अधिकारियों के बीच ताल-मेल के तरीके सुझाएगा।