वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि अर्थव्यवस्था मुश्किल में नहीं है और देश के 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ़ने के साथ ही सकारात्मक संकेत दिखने लगे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा सूचीबद्धता की दिशा में की गईं पहल, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में बढ़ोतरी, कारखाना उत्पादन में इजाफा और पिछले तीन महीनों के दौरान एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जीएसटी संग्रह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था का आकार लगातार बढ़ रहा है, जो 2014-15 में 20 खरब डॉलर के आसपास थी और यह 2019-20 में बढ़कर 29 खरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक धारणा भारत के पक्ष में है और अप्रैल से नवंबर, 2019 के दौरान देश में 24.4 अरब डॉलर का एफडीआई आया, जबकि बीते साल समान अवधि में यह 21.2 अरब डॉलर रहा था। औद्योगिक गतिविधियां बढ़ रही हैं और दो महीने की गिरावट के बाद नवंबर में औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) में 1.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वित्त मंत्री ने कहा कि परचेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) नवंबर के 51.2 से बढ़कर दिसंबर में 52.7 और इस साल जनवरी में 55.3 के स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार इस साल जनवरी तक 456 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वहीं जनवरी में जीएसटी संग्रह 1,10,828 करोड़ रुपये रहा और अप्रैल, 2019 से इस साल जनवरी के बीच छह महीने ऐसे रहे जब छह बार जीएसटी का आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हुआ।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान राजकोषीय घाटा खासा ज्यादा था, जब ‘अर्थव्यवस्था का प्रबंधन कुशल डॉक्टरों के द्वारा किया जा रहा था।’ केंद्रीय मंत्री सीतारमण पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम की उस टिप्पणी का जवाब दे रही थीं, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘अर्थव्यवस्था तबाही के कगार पर है और उसका इलाज अक्षम डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा है।’