वित्त मंत्री ने बताया कि शहरी इलाकों में बस ट्रांसपोर्ट सिस्टम शुरू किया जाएगा। इसके तहत 20 हजार बसें तैयार होंगी। इससे ऑटो सेक्टर को मदद मिलेगी। साथ ही, रोजगार भी बढ़ेगा। वित्त मंत्री ने बताया कि इस वक्त देश में 702 किमी मेट्रो चल रही है। इसके अलावा 27 शहरों में कुल 1016 किमी मेट्रो पर काम चल रहा है। कम लागत से टियर-2 शहरों में मेट्रो लाइट्स और मेट्रो नियो शुरू होगी। कोच्चि मेट्रो में 1900 करोड़ की लागत से 11 किमी हिस्सा बनाया जाएगा। वहीं, चेन्नई में 63 हजार करोड़ रुपये की लागत से 180 किमी लंबा मेट्रो रूट बनेगा। बंगलुरु में भी 14 हजार 788 करोड़ रुपये से 58 किमी लंबी मेट्रो लाइन बनेगी। नागपुर में 5 हजार 976 करोड़ और नासिक में 2 हजार 92 करोड़ से मेट्रो बनेगी।
वित्त मंत्री ने बताया कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए डिवेलपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट की जरूरत है। इसके लिए एक बिल लाया जाएगा। इस पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च हो, जिससे तीन साल में पांच लाख करोड़ रुपये का लैंडिंग पोर्टफोलियो बनाया जा सके। पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉनिटाइज करने पर ध्यान दिया जाएगा। जल्द ही, नेशनल मॉनिटाइजेशन पाइपलाइन लॉन्च होगी। नेशनल हाईवेज अथॉरिटीज भी अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करेंगी। रेलवे भी फ्रेट कॉरिडोर को मॉनिटाइज करेगी। आगे जो भी एयरपोर्ट बनेंगे, उनमें भी मॉनिटाइजेशन पर ध्यान दिया जाएगा।
निर्मला सीतारमण के मुताबिक, भारतमाला प्रोजेक्ट के लिए 3.3 लाख करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। उन्होंने रोड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाने का एलान किया। वित्त मंत्री ने बताया कि 3500 किमी नेशनल हाईवेज प्रोजेक्ट के तहत तमिलनाडु में 1.03 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका कंस्ट्रक्शन अगले साल शुरू होगा। वहीं, 1100 किमी नेशनल हाईवे केरल में बनेगा। इसके तहत मुंबई-कन्याकुमारी कॉरिडोर भी बनेगा। इस पर 65 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। 34 हजार करोड़ रुपये असम में नेशनल हाईवे पर खर्च होंगे। इनके अलावा पश्चिम बंगाल में 675 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 25 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके तहत बंगाल की पुरानी सड़कों की भी मरम्मत की जाएगी। खासतौर पर कोलकाता और सिलीगुड़ी के बीच की सड़कों की हालत में सुधार लाया जाएगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि 2021-21 के लिए रेलवे को 1 लाख 10 हजार 55 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इनमें 1 लाख 7 हजार 100 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए हैं। रेलवे के लिए रेल योजना 2030 तैयार है, जिससे रेलवे प्रणाली बेहतर होगी। वहीं, वेस्टर्न और ईस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर जून, 2022 तक तैयार हो जाएगा।