कुटकी नामक जड़ी बुखार, पीलिया, मधुमेह, न्यूमोनिया में काम आती है। लीवर से संबंधित जितने भी टॉनिक बनते हैं, उनमें कुटकी की मात्रा जरूर होती है। डोलू गुम चोट में, मुलेठी खांसी में, अतीस पेट दर्द में, सालमपंजा शारीरिक दुर्बलता में लाभदायक होता है।
गंदरायण कब्ज, गैस सहित पेट की तमाम समस्याओं में रामबाण साबित होता है। इसे राजमा की दाल में विशेष तौर पर प्रयोग किया जाता है। जंबू की तासीर गर्म होने के कारण इसे दाल में डाला जाता है। भोजपत्र, रतन जोत सहित कई प्रकार की जड़ी ऐसी हैं, जो धूप में प्रयोग होती हैं।
किसानों का प्रोत्साहन के साथ प्रशिक्षण
गोपेश्वर के जड़ी-बूटी शोध संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. विजय भट्ट ने बताया कि आयुर्वेदिक दवाओं में इस्तेमाल होने से बाजार में जड़ी-बूटी की अच्छी मांग है। परंपरागत खेती के बजाय जड़ी-बूटी की खेती करने से किसानों को अच्छा लाभ मिलता है। इसे देखते हुए किसानों को जड़ी-बूटी की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
टेबल
रोग काम आने वाली जड़ी-बूटी
बुखार, पीलिया, मधुमेह, न्यूमोनिया कुटकी
खांसी मुलेठी
पेट दर्द अतीस
शारीरिक दुर्बलता सालमपंजा
कब्ज, गैस सहित पेट की समस्याएं गंदरायण
चोट डोलू गुम