कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ दिलाने के मकसद से पीएमएफबीवाई लाया गया था। ऐसे में हम दावों के भुगतान का प्रतिशत 80 से 90 तक लाना चाहते हैं। कई मामलों में अनदेखी की शिकायतें मिली हैं।
इसलिए नए दिशा-निर्देशों में सख्ती बरतने पर भी सहमति बनी है। कई स्तरों पर तकनीकी कारण दिखाकर दावे खारिज किए जाते हैं, जिनकी समीक्षा जरूरी है। उम्मीद है कि अगले माह में इन दिशा-निर्देशों को लागू कर दिया जाएगा।
किसान देते हैं 2 फीसदी प्रीमियम
किसानों को पीएमएफबीवाई के तहत 2 फीसदी प्रीमियम देना होता है। शेष प्रीमियम केंद्र और राज्यों द्वारा कंपनियों को मुहैया कराया जाता है। वर्ष 2015-16 में शुरू हुई फसल बीमा योजना में 4,200 करोड़ रुपये का प्रीमियम आया था, जो 2016-17 में बढ़कर 22,180 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 24,352 करोड़ रुपये रहा, जबकि माना जा रहा था कि यह 27,000 करोड़ रुपये के आसपास रहेगा।