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Exports: रूस ने पेट्रोल निर्यात रोकने का फैसला लिया; भारत ने कहा- ईंधन भंडार पर्याप्त, चिंता की जरूरत नहीं

Sat, 28 Mar 2026 11:37 PM IST
Jyoti Bhaskar बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।

सार

रूस ने पेट्रोल निर्यात पर एक अप्रैल से प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। रूस की सरकार का कहना है कि कीमतों को नियंत्रित रखने के मकसद से ऐसा किया गया है। दूसरी तरफ भारत सरकार के मुताबिक देश में भंडार पर्याप्त हैं, और पेट्रोल-डीजल को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।
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रूस ने पेट्रोल निर्यात रोकने का फैसला लिया (सांकेतिक) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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वैश्विक अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच रूस सरकार ने एक अप्रैल से पेट्रोल निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। रूसी उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। नोवाक ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्राथमिकता घरेलू ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखना है। रूसी ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार वर्तमान रिफाइनिंग दरें स्थिर हैं और देश के पास पर्याप्त रिजर्व मौजूद है।

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कच्चा तेल और ईंधन का पर्याप्त भंडार सुरक्षित
दूसरी ओर भारत सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और तेल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने मंत्रालयों की संयुक्त समीक्षा में कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष से वैश्विक आपूर्ति और कीमतें प्रभावित हुई हैं, लेकिन भारत के पास अगले दो महीनों के लिए कच्चा तेल और ईंधन का पर्याप्त भंडार सुरक्षित है।
  • रूसी सरकार के मुताबिक निर्यात पर प्रतिबंध का फैसला घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लिया गया है।
  • पश्चिम एशिया में संकट के बीच भारत में किल्लत की आशंकाओं को लेकर पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने दावा किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है।
भारत में घरेलू एलपीजी उत्पादन में 20% की वृद्धि
उन्होंने बताया कि भारतीय रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रहीं। घरेलू एलपीजी उत्पादन में 20% की वृद्धि हुई है। सरकार के इन कदमों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद भारतीय बाजार में आपूर्ति निरंतरता और कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है।
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किन देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?
इस फैसले का असर चीन, तुर्की, ब्राजील, अफ्रीकी देशों और सिंगापुर पर पड़ने की संभावना है। ये देश रूसी पेट्रोलियम उत्पादों के प्रमुख खरीदार हैं। भारत कच्चे तेल का आयात करता है, न कि परिष्कृत पेट्रोल का, इसके चलते भारत पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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