ग्लासगो में एक साक्षात्कार के दौरान राजने कहा कि मैं बेहतरी की उम्मीद करता हैं पर आशंका इस बात की है कि हालात और बिगड़ सकते हैं, क्योंकि हाल के दिनों में आशिक रूप से हमने जो कुछ देखा वह अप्रत्याशित था। राजन ने चेताया है कि एसवीबी और क्रेडिट सुइस संकट ने वित्तीय प्रणाली में अंदर गहराई तक व्याप्त समस्याओं की ओर ध्यान खींचा है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुख्य अर्थशास्त्री रहते हुए रघुराम राजन ने एक दशक से भी अधिक समय पहले वैश्विक वित्तीय संकट की आशंका जाहिर की थी। अब सिलिकॉन वैली बैंक और क्रेडिट सुइस पर आए हालिया संकट के बाद उन्होंने कहा है कि बैकिंग सिस्टम और अधिक उथल-पुथल की ओर बढ़ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रह चुके रघुराम राजन ने कहा है कि बीते एक दशक के दौरान केंद्रीय बैंकों की ओर से उपलब्ध इजी मनी और बेतहाशा लिक्विडिटी की लत लग गई यही संकट तब संकट कारण बनने लगा जब केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति को कड़ा करने लगे।
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केंद्रीय बैंकों के मौद्रिक रुख कड़ा करने से बैंकिंग सेक्टर पर दबाव बढ़ा
ग्लासगो में एक साक्षात्कार के दौरान राजने कहा कि मैं बेहतरी की उम्मीद करता हैं पर आशंका इस बात की है कि हालात और बिगड़ सकते हैं, क्योंकि हाल के दिनों में आशिक रूप से हमने जो कुछ देखा वह अप्रत्याशित था। पूरी चिंता यह है कि बहुत आसान पैसा और लंबी अवधि में हाई लिक्विडिटी विकृत प्रोत्साहन और विकृत संरचनाएं पैदा करती है, यह तब और नाजुक हो जाती हैं जब आप अपना रुख कड़ा कर देते हैं यानी सब कुछ उलट देते हैं। राजन ने चेताया है कि एसवीबी और क्रेडिट सुइस संकट ने वित्तीय प्रणाली में अंदर गहराई तक व्याप्त समस्याओं की ओर ध्यान खींचा है।