सरकार भले ही छोटी राशि के डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के तमाम उपाय कर रही हो पर विशेषज्ञों की मानें तो हरेक भुगतान डिजिटल तरीके से संभव नहीं। आर्थिक विशेषज्ञ प्रणव सेन के मुताबिक रिजर्व बैंक और सरकार को नकदी की पर्याप्त व्यवस्था रखते हुए डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना चाहिए। अन्यथा आम जनता की मुसीबतें बढ़ेंगी।
डिजिटल भुगतान के लिए प्रोत्साहन योजना
नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान के लिए यूपीआई, भीम ऐप को गति देने के लिए सरकार ने प्रोत्साहन योजना की घोषणाएं भी की हैं। इस पर विशेषज्ञ सेन की मानें तो डिजिटल लेनदेन को देश को अपनाने में समय लगेगा। यह संभव नहीं कि तीन-चार साल में यह संभव हो जाए कि नकदी की कमी होने पर लोग डिजिटल लेनदेन कर अपना काम चला लें।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात ये है कि हरेक भुगतान को डिजिटल तरीके से नहीं किया जा सकता। छोटे शहरों, ग्रामीण इलाकों ही नहीं, शहरों में भी पंसारी की दुकान, सब्जी वाले, रेहड़ी-पटरी वाले समेत अन्य तमाम ऐसी व्यवस्थाएं हैं जहां बिना नकदी के काम नहीं चल सकता है। ऐसे में सरकार को डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के साथ नकदी की पर्याप्त व्यवस्था रखनी चाहिए।
सरकार, आरबीआई नहीं कर पाई आकलन
आर्थिक विशेषज्ञ रवि सिंह का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखकर यह स्पष्ट होता है कि आरबीआई और सरकार बाजार में मुद्रा के पर्याप्त मात्रा में होने का सही आकलन नहीं कर पाई। जहां तक डिजिटल लेनदेन का सवाल है, शहरी क्षेत्र में इसका प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है पर छोटे भुगतान में लोग आम तौर पर नकदी का प्रयोग करते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि नकदी पर्याप्त तौर पर बैंकों और एटीएम में मौजूद रहे।
1605 करोड़ का हुआ डिजिटल लेनदेन
आईटी मंत्रालय के मुताबिक गत कारोबारी साल जनवरी तक कुल 1,605.30 करोड़ डिजिटल लेनदेन हुए। इसमें बड़े भुगतान वाले माध्यम आरटीजीएस और एनईएफटी को हटा दिया जाए तो 1,438.31 करोड़ लेनदेन आईएमपीएस, क्रेडिट-डेबिट कार्ड, पीओएस, एम-वॉलैट, पीपीआई कार्ड, भीम, मोबाइल बैंकिंग समेत अन्य से हुए, जो छोटे भुगतान हैं। हालांकि कुल मूल्य 1,462.58 लाख करोड़ रूपये में छोटे भुगतान का मूल्य 133.21 लाख करोड़ रुपये है। जबकि बड़े भुगतान का मूल्य 1,329.37 लाख करोड़ रुपये है।