उर्सुला वॉन डेर लेयेन (फाइल फोटो)
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अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भारतीय प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए यूरोपीयन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा भारत और यूरोपीयन यूनियन (ईयू) हरित ऊर्जा के क्षेत्र में लक्ष्य साझा किए, जिसमें सौर ऊर्जा भी है। ईयू प्रमुख का यह बयान ऊर्जा और संसाधन संस्थान (टीईआरआई), दिल्ली की ओर से रविवार को आयोजित ‘यूथ फॉर ए ग्रीनर फ्यूचर’ कार्यक्रम में आया। ईयू प्रमुख ने कहा, भारत और यूरोपीयन यूनियन में बहुत कुछ समान है। हमने आपका 2030 तक अक्षय ऊर्जा से 50 फीसदी ऊर्जा का लक्ष्य देखा। हम यह विचार साझा करते हैं कि हमें अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास, जल विद्युत व जियोथर्मल की ओर देखना होगा।
उन्होंने कहा, यह अर्थव्यवस्था की सफलता, लोगों की भलाई और जलवायु संरक्षण के लिए आवश्यक तत्व हैं। लेयेन ने इस बात पर संतुष्टि जताई कि उत्सर्जन की कटौती के लिए दुनिया सही दिशा में प्रयास करेगी। ईयू प्रमुख का यह पहला दो दिवसीय भारत दौरा है। उनका राष्ट्रपति कोविंद और प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात कार्यक्रम है।
भारत और ईयू मिलकर कर सकते हैं पूरी दुनिया का भला: उर्सुला वॉन
लेयेन ने कहा कि भारत और यूरोपीय यूनियन में कई समानताएं हैं। जलवायु और पर्यावरण के क्षेत्र में दोनों न केवल अपने लोगों का भला कर सकते हैं बल्कि पूरी दुनिया और इस ग्रह का भला भी कर सकते हैं। उन्होंने इस दिशा में भारत के प्रयासों को सराहा। उन्होंने कहा, भारत और ईयू के लक्ष्य भी समान हैं। हमने 2030 तक अक्षय ऊर्जा की 50 फीसदी हिस्सेदारी का संकल्प लिया है। मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि हम सही दिशा में काम करेंगे तो कार्बन उत्सर्जन को काफी कम कर सकेंगे।
उर्सुला ने कहा, हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास, जल विद्युत व जियोथर्मल की ओर रुख करने के विचार को साझा करते हैं। उन्होंने कहा, यह अर्थव्यवस्था की सफलता, लोगों की भलाई और जलवायु संरक्षण के लिए आवश्यक तत्व हैं। लेयेन ने इस बात पर संतुष्टि जताई कि उत्सर्जन की कटौती के लिए दुनिया सही दिशा में प्रयास करेगी।
जलवायु परिवर्तन पर युवा अपनी आवाज बुलंद करें
योरोपीय आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने, धरती को बचाने और समाधान निकालने के लिए युवाओं को नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने हरित, सतत प्रगतिशील और समान अवसर वाले भविष्य के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संबंधी मुद्दे यूरोपीय संघ और भारत के राजनितिक एजेंडे में सबसे ऊपर हैं। लेयेन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई के लिए युवाओं को अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। उन्होंने कहा, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने और धरती को बचाने के लिए युवाओं के नेतृत्व की जरूरत है और उन्हें ही समाधान भी निकालना है।