कोविड-19 संकट की वजह से लागू लॉकडाडन के बीच कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने करीब छह लाख कंपनियों को राहत दी है। ईपीएफओ इन कंपनियों को अपनी बकाया राशि का भुगतान किए बिना मासिक पीएफ (PF) रिटर्न फाइल करने की अनुमति दे दी है।
मौजूदा समय में ये है नियम
मौजूदा समय में नियोक्ताओं को पीएफ रिटर्न दाखिल करने के साथ-साथ बकाए का भुगतान भी करना होता है। पीएफ रिटर्न में ईपीएफओ द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान का ब्योरा होता है।
इसलिए उठाया गया कदम
श्रम मंत्रालय ने बयान में कहा कि मौजूदा बंद की वजह से कंपनियां सामान्य तरीके से कामकाज नहीं कर पा रही हैं और उन्हें नकदी संकट से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में वे सांविधिक भुगतान नहीं कर पा रही हैं। हालांकि, उन्होंने कर्मचारियों को काम से नहीं हटाया है। बयान में कहा गया है कि इस स्थिति के मद्देनजर मासिक इलेक्ट्रॉनिक चालान-सह-रिटर्न (ECR) को सांविधिक योगदान से अलग कर दिया गया है।
इतनी है ब्याज दर
मालूम हो कि पिछले मार्च में कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर चालू वित्त वर्ष 2019-20 के लिए ब्याज दर घटाकर 8.50 फीसदी कर दी गई थी, जो ईपीएफ की पिछले सात सालों में सबसे कम ब्याज दर है। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए भविष्य निधि पर ब्याज दर 8.65 फीसदी थी। कर्मचारी और उनके नियोक्ता हर महीने ईपीएफ में योगदान करते हैं, जो एक रिटायरमेंट बेनेफिट स्कीम है। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों वेतन का 12-12 फीसदी ईपीएफ में योगदान देतो हैं।