भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से गुरुवार को जारी मासिक बुलेटिन में एक लेख में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था दूसरी तिमाही में गति पकड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद मुद्रास्फीति औसत रूप से केंद्रीय बैंक के छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर से ऊपर बनी रहेगी।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 7.44 प्रतिशत हो गई, जो इससे पिछले महीने 4.87 प्रतिशत थी। महंगाई में यह इजाफा मुख्य रूप से टमाटर, सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के कारण हुआ।
स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महंगाई पर काबू पाने के लिए और अधिक कदम उठाने का संकल्प लिया।
आरबीआई बुलेटिन में 'अर्थव्यवस्था की स्थिति' पर प्रकाशित लेख में कहा गया है कि जून की रीडिंग में दिखा मुद्रास्फीति का रुझान जुलाई में स्पष्ट रूप से सामने आया। टमाटर की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि के बाद अन्य सब्जियां भी महंगी हो गईं। आलेख के अनुसार, 'मुख्य मुद्रास्फीति में नरमी देखी गई है लेकिन दूसरी तिमाही में हेडलाइन मुद्रास्फीति औसतन 6 प्रतिशत से ऊपर रहने का अनुमान है।
यह लेख रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा के नेतृत्व वाली एक टीम ने लिखा है। केंद्रीय बैंक ने हालांकि कहा कि लेख में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और भारतीय रिजर्व बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
लेख में आगे कहा गया है कि औद्योगिक उत्पादन और व्यापार कमजोर होने के साथ, पहली तिमाही के मजबूत प्रदर्शन के बाद वैश्विक सुधार धीमा हो रहा है। लेख के अनुसार, ''दबाव वाले वैश्विक माहौल में भारतीय अर्थव्यवस्था 2023-24 की दूसरी तिमाही में गति पकड़ रही है।" रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी खपत और निश्चित निवेश जैसे घरेलू कारक निर्यात में गिरावट से आने वाले दबाव को कम कर रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 2023-24 के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अपने अनुमान को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। साथ ही इसने सीपीआई की खाद्य श्रेणी में हाल ही में मूल्य वृद्धि को ध्यान में रखते हुए मुद्रास्फीति के अपने अनुमान को भी संशोधित किया।