आर्थिक सर्वेक्षण में सरकारी बैंकों के कर्मचारियों को भी उनमें हिस्सेदार बनाने यानी शेयरों (ईसॉप) की पेशकश किए जाने की वकालत की है, जिससे वह ज्यादा जिम्मेदारी से काम कर सकें। इसमें कहा गया कि जिस तरह भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास हुआ, उस तरह से यहां के बैंकिंग क्षेत्र का विकास नहीं हो सका। भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन यहां का एक भी बैंक दुनिया के 50 बड़े बैंकों में शामिल नहीं है।
इसका मूल कारण खराब कर्ज खाते हैं, जिसकी वजह से वह एनपीए बन गया। यह रकम शिक्षा पर आवंटित राशि की तुलना में दोगुनी है। देश में जितने बैंक फ्रॉड होते हैं, उसमें से 85 फीसदी मामले सरकारी बैंकों के होते हैं और उनका सकल एनपीए 7.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि इस तंत्र को चुस्त-दुरुस्त करने की जरूरत है और बैंक के हर काम में फिनटेक का उपयोग हो।