अमेरिका से संबंध सुधारने का वादा करते हुए सत्ता में आई शहबाज शरीफ सरकार अब पाकिस्तान को और भी मजबूती से चीन के पाले में ले जाती दिख रही है। पाकिस्तानी विश्लेषकों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से लगातार मायूसी हाथ लगने के बाद पाकिस्तान सरकार को शायद चीन के और करीब जाने के अलावा कोई और रास्ता नजर नहीं आया है। फिलहाल, चीन अकेला देश है, जिसने पाकिस्तान को वित्तीय मदद देना जारी रखा है।
पाकिस्तान के विदेश सचिव की चीन यात्रा रविवार को पूरी हुई। उसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया, जिसमें बताया गया कि पाकिस्तान और चीन ने ‘सुरक्षा और राजनीतिक सहयोग’ और बढ़ाने का फैसला किया है। इसके अलावा द्विपक्षीय व्यापार, आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग, पर्यटन आदि क्षेत्रों में भी रिश्ता मजबूत करने पर सहमति बनी है।
पाकिस्तान के विदेश सचिव डॉ. असद माजिद खान शुक्रवार को चीन यात्रा पर गए थे। शनिवार को वहां उनकी चीन के उप विदेश मंत्री सुन वेइदोंग के साथ बातचीत हुई। डॉ. खान के जाने के पहले पाकिस्तानी मीडिया में यह खबर प्रकाशित हुई थी कि बढ़ती आर्थिक मुश्किलों के बीच कहीं और से सहायता ना मिलने के कारण शहबाज शरीफ सरकार ने चीन से संपर्क बढ़ाने का फैसला किया है। खबर है कि जल्द ही पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल असीम मुनीर भी चीन की यात्रा करने वाले हैं।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि दोनों देशों ने उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ाने और संवाद के माध्यमों को और मजबूत करने का फैसला किया है। साथ ही दोनों देशों ने संकल्प जताया है कि चीन-पाकिस्तान इकॉनिक कोरीडोर (सीपीईसी) से जुड़ी सभी परियोजनाओं को अगले एक दशक के अंदर पूरा कर लिया जाएगा। दोनों देशों ने दोहराया है कि सीपीईसी उनके बीच द्विपक्षीय सहयोग और ‘लगातार मजबूत हो रही दोस्ती’ का प्रतीक बना रहेगा।
इस टिप्पणी को हाल के घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि में महत्त्वपूर्ण समझा गया है। कुछ समय पहले यह राय बनी थी कि अमेरिका पाकिस्तान को चीन से दूर करने की रणनीति पर चल रहा है। सीपीईसी को अमेरिका अपने इस मकसद के रास्ते में एक बड़ा कांटा मानता है। समझा जाता है कि इसी कारण आईएमएफ ने पाकिस्तान पर चीन से कर्ज राहत पाने के लिए दबाव बनाया और कुछ ऐसी मांगें रखीं, जिससे पाकिस्तान में नाराजगी पैदा हुई। आम राय है कि आईएमएफ अक्सर अमेरिकी प्रभाव में काम करता है।
डॉ. माजिद खान की यात्रा के बाद जारी बयान से संकेत मिला है कि पाकिस्तान ने चीन से अपने रिश्ते और सीपीईसी को लेकर कोई समझौता ना करने का भरोसा दिया है। बयान में यह दो टूक कहा गया कि सीपीईसी में तीसरे देश की भागीदारी के मौके बनाए जाएंगे, ताकि क्षेत्रीय संपर्क और सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
पाकिस्तानी विदेश सचिव ने इस बात का उल्लेख किया चीन ने पाकिस्तान में आर्थिक स्थिरता के लिए ‘निरंतर और उदार’ समर्थन दिया है और इसके लिए उन्होंने चीन का आभार जताया है। उधर चीन के उप विदेश मंत्री ने वादा किया है कि पाकिस्तान की ‘संप्रभुता, प्रादेशिक अखंडता और आर्थिक सुरक्षा’ के लिए चीन लगातार समर्थन देता रहेगा।