स्पाइसजेट की मुंबई-दुर्गापुर उड़ान के दौरान सामने आई घटना को लेकर विमानन नियामक सख्त हो गया है। इस हादसे को एक आंख खोलने वाली घटना करार देते हुए डीजीसीए ने घोषणा की है कि अब विमानों की रात में जांच शुरू की जाएगी। जांच के दौरान अगर विमानों में कमी पाई गई तो वे उड़ान नहीं भर सकेंगे।
स्पाइसजेट के 70 विमान जांचे गए
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के डायरेक्टर जनरल अरुण कुमार ने स्पाइसजेट मामले को लेकर ये निरीक्षण कार्यक्रम शुरू करने का आदेश दिया है। डीजीसीए ने कहा है कि कमजोर या पुराने फ्लीट वाले भारतीय विमानों की अब देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर जांच की जाएगी। इन विमानों की फिटनेस चेक करने के साथ केबिन की जांच तब की जाएगी जब ये रात में हवाई अड्डों पर पार्क होंगे। यहां बता दें कि हादसे के बाद अब तक स्पाइसजेट के बेड़े में शामिल 70 विमानों की जांच की गई है।
बड़े पैमाने पर चलेगा निरीक्षण कार्यक्रम
अरुण कुमार ने कहा कि हम इस निरीक्षण कार्यक्रम को बड़े पैमाने पर करने जा रहे हैं। हमारा विचार है कि पूरे बेड़े की जांच करना और जहां भी जरूरी हो निवारण करना है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय प्रत्येक विमान की अच्छी तरह से जांच करने के लिए अपनी टीमों को भेजेगा। यह टीम आम शिकायतों के आधार पर टूटे हुए हैंड रेस्ट, मील टेबल, खिड़की के शीशे और फटी हुई सीटों की जांच करेगी।
वायुमंडलीय विक्षोभ में फंस गया था विमान
गौरतलब है कि एक मई रविवार को स्पाइसजेट के मुंबई-दुर्गापुर के बीच उड़ान भरने वाला विमान हवाईअड्डे पर लैंड करते समय गंभीर वायुमंडलीय विक्षोभ में फंस गया था। इसके चलते विमान में जोरदार झटका लगा और यात्रियों का सामान उनके ऊपर आ गिरा। इस घटना में तीन क्रू मेंबर समेत 17 यात्री घायल हो गए थे। इनमें से दो घायल यात्री फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं।