भारत से आउटसोर्स करने वाली विदेशी आईटी कंपनियों में नौकरियों में कटौती और मौजूदा कर्मचारियों के साथ परियोजनाएं पूरी करने की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। विदेशी कंपनियों के इस कदम से इंजीनियरिंग छात्रों के सामने नौकरी का संकट खड़ा हो सकता है, जो सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) को दशकों से पसंदीदा क्षेत्र के रूप में देख रहे हैं।
मंदी और अमेरिकी बैंकिंग संकट ने बढ़ाई चिंता
स्टाफिंग फर्म एनएलबी सर्विसेज के सीईओ सचिन अलुग ने बताया कि महामारी के बाद के दौर में कंपनियों ने बाजार में नई मांगों को पूरा करने के लिए उत्पादन में बढ़ोतरी की। इससे आईटी कंपनियों की भर्तियों में तेजी देखी गई। हालांकि, यह उछाल जल्द ही वैश्विक आर्थिक संकट और बढ़ती मंदी के सामने फीका पड़ गया। अमेरिका के तीन बैंकों के दिवालिया होने और क्रेडिट सुइस संकट ने वैश्विक वित्तीय उद्योग को हिला कर रख दिया।
इसलिए, जीडीपी के लिए महत्वपूर्ण है आईटी क्षेत्र
विप्रो के चेयरमैन रिशद प्रेमजी के मुताबिक, घरेलू जीडीपी में आईटी क्षेत्र का योगदान बढ़कर करीब 8 फीसदी पहुंच गया है। करीब 30 साल पहले यह एक फीसदी से भी कम था।
आईटी क्षेत्र से बाहर नौकरी खोजने में मुश्किल
भारतीय इंजीनियरों को आईटी क्षेत्र से बाहर नौकरी खोजने में मुश्किल हो सकती है क्योंकि फंडिंग की कमी से स्टार्टअप भी छंटनी कर रहे हैं। आईटी उद्योग के कुछ दिग्गजों ने कहा, भारतीय छात्रों को अन्य क्षेत्रों में नौकरी की तलाश करनी चाहिए।