देश की ज्यादातर नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों पर डीएचएफएल का असर पड़ने की संभावना है। रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा है कि इससे पता चलता है कि इन कंपनियों में पहले की तरह फंडिंग नहीं हो रही है, जिससे वो लोन का ब्याज भी तय समय पर जमा नहीं कर पा रही हैं।
अभी भी देश की कई ऐसी कंपनियां पूंजी के संकट से जूझ रही हैं। आईएलएंडएफएस संकट से अभी तक एनबीएफसी कंपनियां पूरे तौर पर उबर नहीं पाई हैं। डीएचएफएल देश की सबसे बड़ी एनबीएफसी कंपनी है। इसका देश के ज्यादातर म्यूचुअल फंड पर भी असर पड़ा है। हाल ही में कंपनी 1000 करोड़ रुपये का ब्याज जमा करने से चूक गई थी। अभी देश में उधार देने के मामले में 20 फीसदी हिस्सेदारी है। पांच साल पहले इसकी हिस्सेदारी 15 फीसदी है।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने कहा कि वह पिछले कई महीनों से गैर - वित्तीय बैंकिंग कंपनी (एनबीएफसी) क्षेत्र को दिए कर्ज पर करीब से नजर रखे हुए है और अपने हितों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठा रहा है। बैंक ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
फिच ने कहा है कि देश में इन दो कंपनियों पर संकट आने से क्रेडिट ग्रोथ कम रहने की आशंका है। ऐसा इसलिए क्योंकि बैंकों के पास पहले से ही पूंजी की तरलता काफी कम है। वहीं एनबीएफसी को फंडिंग के लिए काफी कड़े नियमों का पालन करना पड़ रहा है।
देश के छोटे शहरों व गांवों में अभी भी लोग एनबीएफसी कंपनियों से ही कर्ज लेते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इन कंपनियों के नियम तो सरल होते ही हैं, साथ ही इनका नेटवर्क भी काफी मजबूत है।