जमीन पर खड़ी जेट एयरवेज को एक बार फिर से पंख लग सकते हैं। नागर विमानन मंत्रालय और विमानन नियामक डीजीसीए ने राष्ट्रीय कंपनी विधि प्राधिकरण (एनसीएलटी) को इस बारे में भरोसा दिया है कि वो जल्द ही इस कंपनी को शुरू करने के लिए काफी गंभीर है। डीजीसीए ने कहा है कि अगर कोई कंपनी जेट एयरवेज को फिर से शुरू करना चाहती हैऔर उसके बारे में ठोस प्लान है, तो वो अच्छे से गौर करेगी।
मंत्रालय की तरफ से पेश हुए वकीलों ने एनसीएलटी से कहा कि अगर जेट एयरवेज के संभावित निवेशक किसी प्लान के साथ उड़ान भरने को तैयार हैं, तो फिर इसको उनकी तरफ से हरी झंडी मिलेगी। वहीं वकीलों ने यह भी कहा कि एयरलाइन को मिले हुए स्लॉट अभी भी बचे हुए हैं। इसका प्रयोग कोई अन्य एयरलाइन उपयोग नहीं कर सकती है। हवाई अड्डों पर मौजूद स्लॉट को लेने के लिए आखिरी तारीख 15 जनवरी है।
जेट एयरवेज को बंद हुई करीब आठ महीने हो गए हैं। कंपनी के बंद होने से 20,000 लोगों की नौकरी पर संकट आ गया था। कंपनी के पास कर्मचारियों कोवेतन देने के लिए भी पैसे नहीं थे। इतना ही नहीं, भारी नकदी संकट से डूबने की कगार पर पहुंची निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी जेट एयरवेज अपने 20,000 से अधिक कर्मचारियों की मेडिक्लेम सुविधा भी बंद कर दी थी। एयरलाइन ने कर्मचारियों से कहा था कि वह समूह मेडिक्लेम पॉलिसी का प्रीमियम भरने की स्थिति में नहीं है।
जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल ने देश और विदेश में अपनी बहुत सारी कंपनियां बनाकर टैक्स चोरी की दर्जनों योजनाओं का एक ‘ढांचा’ तैयार किया था और इससे बड़े पैमाने पर बचने वाले पैसे को विदेशों में स्थानांतरित कर दिया। हालांकि इस रकम की सही संख्या का पता नहीं लगा है, लेकिन इतना माना जा रहा है कि गोयल ने अरबों रुपये बचाकर विदेश भेजे थे।
20 जून को कंपनी ने इनसॉल्वेंसी के लिए आवेदन किया था। इन्सोलवेंसी ऑर्डर में कहा गया था कि एयरलाइन को बचाना राष्ट्रीय महत्व से जुड़ा हुआ है। कंपनी के पास 20,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं। वेबसाइट के अनुसार, क्रेडिटर्स ने 30,907 करोड़ रुपये के दावे किए हैं। रिजोल्यूशन प्लान में अब तक 14,000 करोड़ रुपये के दावे पेश किए गए हैं।