केंद्र सरकार जल्द ही क्रिप्टोकरेंसी पर बड़ा कदम उठा सकती है। सरकार इसे असेट या कमोडिटी की कैटेगरी में डाल सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस पर टैक्स को लेकर स्थिति साफ नहीं है। एक सूत्र ने कहा कि क्रिप्टो एसेट्स को उनकी तकनीक या एंड यूज के आधार पर परिभाषित किया जाएगा।
फिलहाल सरकार के सामने यह दिक्कत है कि क्रिप्टोकरेंसी को क्या मानकर इस पर टैक्स लगाया जाए। इसे करेंसी, कमोडिटी या इक्विटी शेयर जैसा एसेट माना जाए या सर्विस। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इन सब बातों को साफ करने के लिए एक कानून बना सकती है। क्रिप्टोकरेंसी की परिभाषा इस हिसाब से तय की जा सकती है कि वह किस तकनीक पर आधारित है या फिर इसका इस्तेमाल किस तरह हो रहा है। वर्गीकरण होने के बाद इस पर टैक्स लगाया जा सकेगा।
डिजिटल मुद्रा से जुड़े विधेयक को लेकर मंत्रिमंडल की मंजूरी का इंतजार
हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि डिजिटल मुद्रा से जुड़े विधेयक को लेकर मंत्रिमंडल की मंजूरी का इंतजार है। प्रस्तावित विधेयक मंत्रिमंडल के सामने रख दिया गया है। आर्थिक मामलों के सचिव की अध्यक्षता में गठित क्रिप्टोकरेंसी पर अंतर-मंत्रालयी समिति ने डिजिटल करेंसी से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करने और विशिष्ट कार्यों का प्रस्ताव पेश करने के लिए अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी है।
दिसंबर तक आ सकती है केंद्रीय बैंक की डिजिटल करेंसी
भारत में दिसंबर तक आरबीआई अपनी डिजिटल करेंसी लॉन्च कर सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शिशकांत दास ने कहा था कि दिसंबर में डिजिटल करेंसी को ट्रायल के तौर पर लाया जाएगा। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो इसे बड़े स्तर पर लॉन्च किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हम इस मामले में जल्दबाजी नहीं करना चाहते। इसलिए केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी को लेकर ज्यादा सावधानी बरत रही है।