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Crude Oil: ईरान-इस्राइल युद्ध में अमेरिका की एंट्री से सहमा कच्चे तेल का बाजार, शेयरों में आई गिरावट

Mon, 23 Jun 2025 10:41 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है और अपनी जरूरत की आधी प्राकृतिक गैस भी आयात करता है। भारत का कच्चे तेल का 40 प्रतिशत से ज्यादा और प्राकृतिक गैस का आधा हिस्सा पश्चिम एशिया से ही आता है। 
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कच्चे तेल के व्यापार से जुड़ी कंपनियों के शेयर गिरे - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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ईरान इस्राइल युद्ध में अमेरिका की एंट्री से पश्चिम एशिया के हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। इसका सीधा असर दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों पर हुआ है। सोमवार को विभिन्न तेल कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। तेल कंपनियों के साथ ही कच्चे तेल से जुड़ी अन्य सेक्टर जैसे तेल मार्केटिंग कंपनी, विमानन, पेंट्स और चिपकाने वाले पदार्थ आदि की कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट आई है। 
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तेल कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के शेयरों में सोमवार को 1.54 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। साथ ही इंडियन ऑयल कोर्पोरेशन के शेयरों में 1.22 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शेयरों में एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। विमानन कंपनी स्पाइसजेट के शेयर 2.47 प्रतिशत और इंटरग्लोब एविएशन के शेयर 2.24 प्रतिशत गिरे हैं। अमेरिका ने शनिवार देर रात ईरान के तीन प्रमुख परमाणु केंद्रों फोर्डो, नतांज और इस्फहान के ठिकानों पर बमबारी की। इस पर ईरान ने भी बदला लेने की बात कही है। ईरान को दुनिया के कई देशों का भी साथ मिल रहा है, जिनमें रूस और चीन प्रमुख हैं। 

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भारत पर भी होगा असर
कानसाई नेरोलेक पेंट्स के शेयरों में भी 3 प्रतिशत की गिरावट आई है। बर्जर पेंट्स के शेयरों में 2 प्रतिशत, एशियन पेंट्स के शेयरों में 1.38 प्रतिशत और एकजो नोबेल इंडिया के शेयर 0.42 प्रतिशत की गिरावट आई है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क पर कच्चे तेल की कीमतें 1.96 प्रतिशत बढ़कर 78.52 डॉलर प्रति बैरल हो गया। हालात अगर और तनावपूर्ण हुए या संघर्ष लंबा खिंचा तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आने की आशंका है। जनवरी के बाद से वैश्विक तेल की कीमतें फिलहाल सबसे ज्यादा हैं और इसकी वजह पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव है।

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