फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Textile Industry: बांग्लादेश में संकट से आपूर्ति शृंखला पर दबाव, भारत में बढ़ सकती है खरीदारों की दिलचस्पी

Thu, 08 Aug 2024 07:41 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

बांग्लादेश में गहराए राजनीतिक संकट के कारण भारत के कपड़ा और परिधान क्षेत्र के लिए थोड़ी परेशानी बढ़ा दी लेकिन साथ में उद्योग के लिए अवसर को बढ़ा दिया है। उद्योग के जानकारों और विशेषज्ञों का कहना है कि परिधान कारोबार में बांग्लादेश में हुए संकट में कई विदेशी खरीदार अब भारत को चीन प्लस नीति के रूप में देख रहे होंगे। ऐसे में भारत उन देशों के लिए चीन से बेहतर विकल्प के रूप में उभर सकता है।
विज्ञापन
बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बांग्लादेश में गहराए राजनीतिक संकट के कारण भारत के कपड़ा और परिधान क्षेत्र के लिए थोड़ी परेशानी बढ़ा दी लेकिन साथ में उद्योग के लिए अवसर को बढ़ा दिया है। उद्योग के जानकारों और विशेषज्ञों का कहना है कि परिधान कारोबार में बांग्लादेश में हुए संकट में कई विदेशी खरीदार अब भारत को चीन प्लस नीति के रूप में देख रहे होंगे। ऐसे में भारत उन देशों के लिए चीन से बेहतर विकल्प के रूप में उभर सकता है। पिछले कुछ दशक बांग्लादेश ने रेडीमेट परिधान उद्योग में भारत से काफी आगे है, जिसका मूल्य 2023 में लगभग 1,110 अरब डॉलर रहा था। परिधान उद्योग इसको एक अवसर के रूप में भी देख रहा है। उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि भारतीय कपड़ा केंद्र तिरुपुर जो कि अपनी मजबूत कपड़ा और परिधान मैन्युफैक्चरिंग के लिए जाना जाता है उसको और मजबूत कर इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि सरकार को उन देशों के साथ जिनके साथ हमारे व्यापारिक संबंध बहुत ही मजबूत हैं वहां निर्यात की संभावनाओं को तलाशने की जरूरत है। लेकिन यह थोड़ी सी जल्दबाजी होगी हमें अभी स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है।

विज्ञापन


भारत के लिए रेडीमेड परिधान उद्योग के लिए अवसर
टैक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल का कहना है कि बांग्लादेश में फिलहाल शांती कब आएगी यह कहना मुश्किल होगा। लेकिन परिधान निर्यात में बड़ा हिस्सा रखने वाले बांग्लादेश से होने वाली डिलीवरी नहीं हो पाएगी। जिसकी वजह से सूती परिधानों के ऑर्डर भारत की ओर शिफ्ट होने की संभावना है। वहीं कॉटन एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल गणात्रा बताते हैं कि बांग्लादेश भारत के कपास का बड़ा निर्यातक है लेकिन अभी सीजन सामाप्त हो जाने की वजह से इस कोई असर नहीं होगा। लंबे समय में परिस्थितियां कैसी बनती है यह देखना होगा। वे कहते हैं कि यह डेवलपमेंट भारतीय परिधान मैन्युफैक्चर्स के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ब्रांड अपनी मांग को पूरा करने के लिए भारत की ओर रूख करेंगे। इसके साथ ही बांग्लादेश से सस्ते कपड़े की डपिंग जो कि भारत में होती थी वह अब रुक जाएगी और घरेलू कारोबार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। एमके रिर्सच के एनालिस्ट आर भागवानी का कहना है कि भारत का कपड़ा उद्योग जिसने पिछले कुछ दशकों में खराब प्रदर्शन किया है। बावजूद इसके वह इस अवसर का फायदा उठा सकता है, लेकिन उसे वियतनाम और चीन और अन्य देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामान करना पड़ सकता है। चीन और वियतनाम जैसे देश भी इस अवसर को नहीं छोड़ेगे वह भी इस मौके का लाभ लेंगे। इसलिए यदि बांग्लादेश में लंबे समय तक स्थिरता नहीं आती है तो रेडीमेड परिधान की आपूर्ति में बदलाव देखने को मिलेंगे।
तमिलनाडु स्पिनिंग मिल्स एसोसिएशन के मुख्य सलाहकार के वेंकटचलम ने कहा कि अगर परिधान ऑर्डर को भारत में भेज दिया जाता है, तो देश के पास किसी भी आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा है। इस अवसर को उचित रूप से भुनाने की जरूरत है।
विज्ञापन


भारत में छोटे और मध्यम दर्जे की इकाइयां करती हैं निर्माण
क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) मेंटर चीफ राहुल मेहता का कहना है कि बांग्लादेश के साथ हमारे कारोबारी रिश्ते काफी मजबूत हैं। लेकिन वहां जो डेवलपमेंट हुआ है उसको लेकर यह कह देना कि गार्मेंट उद्योग में भारत के लिए अवसर है यह कहना थोड़ा जल्दबाजी होगी। इसकी प्रमुख वजह यह है कि गार्मेंट में बांग्लादेश भारत से काफी आगे है। हमारे देश के कई गार्मेंट ब्रांड वहां की आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर करते हैं। जिनकी डिलिवरी पर तुंरत असर पड़ रहा है। दूसरा बांग्लादेश में लॉर्ज स्केल पर गार्मेंट इकाइयां काम करती हैं। जबकि भारत में छोटे और मध्यम दर्जे पर गार्मेंट इकाइयां अधिक हैं। हमारे पास सस्ती लेबर नहीं और कच्चे माल को लेकर भी परेशानियां हैं। हालांकि गोकल दास, सेंचुर मिल्स और अरविंद मिल्स बड़ी कंपनियां हैं जिनको लाभ मिल सकता है और उन्हें यह लाभ उठाना भी चाहिए। वे बताते हैं कि भारत का परिधान निर्यात 16 बिलियन डॉलर का है जबकि बांग्लादेश का परिधान निर्यात 40 बिलियन डॉलर का है। इस बड़े अंतर को भारत को पाटने में काफी समय लगेगा।  

कपड़ा उद्योग को इन बदलावों की है आस
तिरुपुर निर्यातक और निर्माता संघ के अध्यक्ष मुथुराथिनम ने कहा कि भारतीस परिधान उद्योग को लागत के मामले में भारी अंतर का सामना करना पड़ता है जिसकी वजह से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है । बांग्लादेश के गार्मेंट अथवा परिधान भारतीय परिधानों की तुलना में 20 से 25 प्रतिशत सस्ते हैं। इसमें अंतर इसलिए है कि बांग्लादेश में वायु्, जल प्रदूषण और बाल श्रम पर सख्त नियम नहीं है। वहां परिधान विनिर्माण क्षेत्रों को कर से छूट दी जाती है। इसके साथ ही आयात पर शुल्क न होने की वजह से वह भारतीय बाजारों से आगे हैं। भारत में नियम और कानून का पालन होने और विनियामक ढांचा नैतिक उत्पादन को सुनिश्चित करता है इसलिए यहां लागत बढ़ जाती है। गुजरात गार्मेंट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय पुरोहित बताते हैं कि भारत को दीर्घकालिक लाभ होगा क्योंकि बांग्लादेश में लागत कम है, दूसरा कच्चे माल उपलब्धता और सस्ते बिजली व श्रम के साथ अनुकूल सरकारी नीतियों होने से उनकी लागत कम होती है और वह हमसे 20 से 25 प्रतिशत सस्ते होते हैं। घरेलू बाजार में टेक्साटाइल उद्योग कई तरह की परेशानियों से झूझ रहा है। छोटे स्तर पर इकाइयां होने से प्रोडक्शन बड़े स्तर पर नहीं हो पाता है। बांग्लादेश में जहां इकाइयां बड़ी है और एक साथ हजारों का लॉट निकाला जाता है। अगर कुछ समय में हालात बांग्लादेश में ठीक हो जाते हैं तो यह स्थिति सामान्य हो जाएगी और उनका कारोबार पटरी पर आ जाएगा।

सरकारी प्रोत्साहन की जरूरत
मुंबई में भिवंडी पावर लूम एसोसिएशन के प्रवक्ता शरद रामपाल का कहना है कि यह अवसर जरूर हो सकता है और इसका फायदा भी भारतीय गार्मेंट उद्योग को उठाने की जरूरत है। लेकिन परेशानी यह है कि गार्मेंट को लेकर कई तरह की पॉलिसी लाने की जरूरत होगी। कई तरह से परमिशन की भी जरूरत होगी तब ही हम बांग्लादेश से आगे निकल सकते हैं। देश बड़े निर्यातकों को इसका लाभ अवश्य मिलेगा। हमें उन देशों के साथ परिधान निर्यात की संभावनाएं तलाशनी होंगी जिनके साथ भारत के अच्छे सबंध हैं और व्यापारिक समझौते हैं। वे बताते हैं कि मुंबई में भिवंडी पावरलूम का हब माना जाता है, लेकिन आज यहां की हालत खराब है। बिजली की बढ़ती दरें और कच्चे माल की अनुकूल उपलब्धता नहीं होने से व्यापार बंद होने की कगार पर है। कारोबार को प्रोत्साहन देने के बजाए सरकार आश्वासन देती है। मुथुराथिनम कहते हैं कि कपड़ा उद्योग कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है लेकिन भारत में इसको प्रोत्साहन नहीं दिया जाता है। पहले तो 20 प्रतिशत प्रोत्साहन मिलता था जो अब 2 प्रतिशत रह गया है। हमें इसके लिए पर्याप्त वातावरण और पॉलिसी बनानी होंगी। बांग्लादेश के तनाव से हमें कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि व्यापार उस देश के कानून के अंदर रह कर काम करता है। हमारी सरकार को परिधान उद्योग पर ध्यान और प्रोत्साहन देने की जरूरत है। तब ही हम इस अवसर का फायदा उठा सकते हैं। यार्न एवं कपड़ा निर्माता शिखर चंद्र जैन बताते हैं कि चीन वैश्विक स्तर पर 34 प्रतिशत गार्मेंट का उत्पादन करता है, बांग्लादेश 12 प्रतिशत करता है जबकि भारत सभी संसाधनों के होने के बाद भी केवल 4 प्रतिशत ही गार्मेंट का निर्माण या उत्पादन करता है।

उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है
जानकारों का कहना है कि बांग्लादेश में उपजा संकट घरेलू यार्न और फेब्रिक उद्योग के लिए परेशानी भी लेकर आया है। बांग्लादेश कपड़े का बड़ा निर्यातक है वह भारत के यार्न और फेब्रिक का सबसे बड़ा खरीदार है। इस परेशानी की वजह से स्पीनिंग सेक्टर प्रभावित हो सकता है। यदि बांग्लादेश में शांती बहाल हो जाती है जिसकी हमें उम्मीद है तो इस सेक्टर में एक बार फिर से जोरदार मांग देखी जा सकेगी। भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ (सीआईटीआई) का कहना है कि बांग्लादेश में राजनितक संकट की वजह से आपूर्ति में परेशानी हो सकती है इसकी वजह से आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव पड़ेगा। कई प्रमुख वैश्विक ब्रांड जो अपनी सोर्सिंग जरूरतों के लिए बांग्लादेश पर निर्भर हैं, वे भी इन व्यवधानों से प्रभावित होंगे। जिन ब्रांडों की आपूर्ति शृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बांग्लादेश में है, उन्हें अपने उत्पादों की उपलब्धता में देरी और कमी देखने को मिल सकती है। इससे वैश्विक रिटेल बाजार पर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे इन्वेंट्री स्तर और बिक्री प्रभावित हो सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें