बजट 2021 को देखकर लगता है कि कोरोना ने पूरे देश के बजट को हेल्थ बजट में तब्दील करके रख दिया। सरकार ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए स्वास्थ्य बजट में 137 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी। पिछले साल के 92 हजार करोड़ रुपये के स्वास्थ्य बजट को बढ़ाकर इस साल दो लाख 32 हजार 846 करोड़ कर दिया गया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे बेहद सकारात्मक तरीके से देख रहे हैं। सरकार ने चार नए वायरोलॉजी संस्थान की स्थापना करने से लेकर जिला स्तर तक स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने का जो खाका खींचा है, वह स्वास्थ्य सुविधाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में काफी मददगार साबित हो सकता है।
पूरे देश के लिए चिंता का सबब बनी कोरोना की वैक्सीन लगाने के लिए सरकार ने 35 हजार करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इसे बेहद जरूरी और सामयिक माना जा रहा है। हालांकि देश की विशाल आबादी को देखते हुए कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे नाकाफी बता रहे हैं। लेकिन भविष्य में वायरस जनित रोगों पर रिसर्च के लिए चार नए वायरोलॉजी संस्थान की स्थापना को काफी सराहना मिल रही है।
सरकार ने घोषणा की है कि देश के हर जिला स्तर पर एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र, इंटीग्रेटेड हेल्थ लैब की स्थापना की जाएगी। इससे स्वास्थ्य सुविधाओं को निचले स्तर तक ले जाने में मदद मिलेगी। देश में 17 हजार हेल्थ सेंटरों की स्थापना की जाएगी। शहरी स्वच्छ भारत मिशन को और अधिक धार देने की घोषणा की गई है। इससे स्वास्थ्य पर आने वाले खर्च में कटौती होगी और लोगों को राहत मिलेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि देश के हर गरीब मजदूर को ईएसआई सुविधा से जोड़ा जाएगा। इससे देश के गरीबों को कम लागत पर अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी। इससे गरीब वर्ग बच्चों की शिक्षा पर ज्यादा खर्च कर सकेगा।
दिल्ली स्थित एग्जामिनिंग बॉडी फॉर पैरामेडिकल ट्रेनिंग फॉर भारतीय चिकित्सा के चेयरमैन डॉ. प्रदीप अग्रवाल ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि स्वास्थ्य को देखते हुए सरकार ने एक अच्छा बजट पेश किया है। लेकिन देश की विशाल आबादी को देखते हुए यह बहुत कम है। सरकार को दिल्ली सरकार की तरह हर गांव के स्तर पर एक प्राथमिक सेंटर खोलने की कोशिश करनी चाहिए।
सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया है। इससे देश में डॉक्टरों-नर्सों की कमी को पूरा करने में मदद नहीं मिलेगी। सरकार को इस क्षेत्र में विशेष ध्यान देना चाहिए।